रोहतक (हरियाणा)। पीजीआईएमएस में अल्ट्रासाउंड का संकट छाया हुआ है। मरीजों को महीनों की वेटिंग िमल रही है। सूबे का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान इन दिनों गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है। यहां अल्ट्रासाउंड जैसी बेसिक जांच के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यह सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर करता है। अस्पताल में मशीनों को चलाने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। रेडियोलॉजी विभाग में केवल दो रेडियोलॉजिस्ट हैं। इनके कंधों पर हजारों मरीजों का बोझ है। इससे रोजाना 600 मरीजों के स्थान पर सिर्फ 150 अल्ट्रासाउंड ही हो पा रहे हैं।
पीजीआईएमएस पर सिर्फ रोहतक ही नहीं, आसपास के सोनीपत, झज्जर, भिवानी, जींद जैसे जिलों का भी भारी दबाव है। पेट दर्द, किडनी स्टोन जैसी सामान्य जांचों के लिए भी मरीज महीनों लाइन में लगे हैं।
सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सिर्फ 50 रुपये में होता है। जब यहां नंबर नहीं आता, तो मजबूरी में मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। वहां यही जांच 700 से 1200 रुपये तक में की जा रही हैं। यानी एक तरफ इलाज में देरी, दूसरी तरफ जेब पर भारी बोझ। सबसे ज्यादा असर गरीब वर्ग पर पड़ रहा है।
प्राइवेट सेक्टर की चांदी
सरकारी व्यवस्था की कमजोरी का सीधा फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं। शहर में रोजाना 2500 से ज्यादा अल्ट्रासाउंड प्राइवेट सेक्टर में किए जा रहे हैं। इससे साफ है कि सरकारी सिस्टम की कमी का आर्थिक फायदा निजी संस्थानों को मिल रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार आपातकालीन मामलों को तुरंत जांच की सुविधा दी जा रही है। सामान्य मरीजों के लिए लंबा इंतजार अब मजबूरी बन चुका है। नए रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती प्रक्रिया चल रही है।










