बंगलूरू (कर्नाटक)। जेनेरिक दवा पर ब्रांडेड लेबल लगा बिक्री करने के मामले में कार्रवाई हुई है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने की है। नकली दवाओं के कथित रैकेट के पांच ठिकानों पर दबिश दी गई है। यह तलाशी दर्ज एफआईआर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के चलते की गई है।
फार्महाउस में थी अवैध दवा फैक्ट्री
यह एफआईआर सीके तांड्या गांव की एक आवासीय संपत्ति पर छापेमारी से संबंधित है। वहां आरोपी बिना किसी वैध लाइसेंस के दवाएं जमा किए हुए थे। इन दवाओं के लेबल भी बदल रखे थे। इस आधार पर ईडी ने एफआईआर दर्ज की थी। पता चला कि आर. प्रशांत ने बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। वहां बिना परमिट के दवाओं का निर्माण और रीलेबलिंग की जाती थी। सस्ती दवाओं को यहां नई शीशियों में पैक किया जाता था। उन पर फाइजर की महंगी एंटीबायोटिक दवाओं के लेबल लगाए जाते थे।
सस्ती दवा पर फाइजर ब्रांड के लेबल
इन शीशियों में असल में जेनेरिक दवाएं होती थीं। उन पर फाइजर ब्रांड के लेबल लगे होते थे। कथित तौर पर, इन दवाओं को एमएस डीएम फार्मास्यूटिकल्स के जरिए बांटा जाता था। उन्हें एमएस कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई किया जाता था। इसके बाद एमएस कृपा हेल्थकेयर इन्हें अन्य दवा कंपनियों और अस्पतालों को सप्लाई करता था। वहां असली दवाओं के साथ ये नकली दवाएं भी भेजी जाती थीं। ताकि किसी को शक न हो। तलाशी के दौरान वीरेश कुमार के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इनमें लगभग 9 लाख रुपये जमा थे। कई लोगों से जुड़े डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज भी जब्त किए हैं।





