नई दिल्ली। फार्मा उपहार केस में 30 डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई है। यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता डॉक्टरों ने अंतरिम राहत दिए जाने करी गुहार लगाई थी। इन डॉक्टरों ने फार्मा मार्केटिंग प्रथाओं से संबंधित शीर्ष समिति के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया था।

यह है मामला

एक गुमनाम शिकायत पर औषधि विभाग ने एबवी हेल्थकेयर इंडिया को फटकार लगाई थी। आरोप था कि कंपनी ने बोटॉक्स और जुवेडर्म उत्पादों के प्रचार से जुड़े डॉक्टरों पर 1.91 करोड़ रुपये खर्च किए। उन्हें मोनाको और पेरिस की लग्जरी विदेश यात्राएं कराई थीं। इसके बाद विभाग ने संबंधित डॉक्टरों के नाम एनएमसी को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भेज दिए। डॉक्टरों ने दलील दी कि उन्होंने कंपनी के साथ केवल ज्ञान प्रसार संबंधी पेशेवर सेवा समझौते किए। उन्हें शीर्ष समिति के आदेश की जानकारी भी महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के नोटिस पर मिली।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पूरी कार्रवाई एक गुमनाम शिकायत पर आधारित है। फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रथाओं की समान आचार संहिता गुमनाम शिकायतों पर विचार करने से रोकती है। डॉक्टरों ने कहा कि शिकायतकर्ता की पहचान बताना अनिवार्य है। गुमनाम अथवा छद्म नाम से की गई शिकायत स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल नियम का भी उल्लेख किया। इसके तहत ऐसी शिकायतों की अनदेखी की जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि अब तक प्रतिवादियों की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ है।