नई दिल्ली। अमेरिकी दवा कंपनी को हेपेटाइटिस सी कॉम्बो थेरेपी पर पेटेंट नहीं मिलेगा। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने कंपनी को glecaprevir/pibrentasvir पर पेटेंट देने से मना किया है।
पब्लिक हेल्थ एडवोकेसी ग्रुप ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। यह आदेश भारत के पेटेंट सुरक्षा उपायों की अहमियत दिखाता है। इसमें प्री-ग्रांट अपोजिशन भी शामिल है। ये उपाय ऐसे गैर-जरूरी पेटेंट एकाधिकारों को रोकते हैं। इनकी वजह से दवाएं मिलने में देरी हो सकती है। अमेरिकी कंपनी जिस कॉम्बो थेरेपी के लिए पेटेंट मांग रही थी।
उसे हेपेटाइटिस C के इलाज के लिए एक अहम तरीका माना जाता है। मरीजों तक इसकी पहुंच के लिए थेरेपी का सस्ता वर्जन उपलब्ध होना जरूरी है। लेकिन पेटेंट मिल जाने से ऐसा नहीं हो पाता। हेपेटाइटिस C कॉम्बो थेरेपी glecaprevir/pibrentasvir को दुनिया भर में Mavyret नाम से बेचा जाता है। भारतीय पेटेंट कार्यालय के फैसले के कारण कंपनी glecaprevir/pibrentasvir के मिश्रण पर दूसरा पेटेंट हासिल नहीं कर पाएगी।
पेटेंट मिल जाने से कंपनी का बाजार में एकाधिकार बढ़ जाता। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने यह अस्वीकृति पेटेंट अधिनियम की धारा 15 के तहत की है। आदेश में कहा गया है AbbVie ने जवाब में कोई बयान या सबूत पेश नहीं किया। AbbVie ने पेटेंट कार्यालय को आवेदन वापस लेने की जानकारी दे दी है।








