अस्पतालों में तड़पते लोगों के हर सांस की कीमत लगा रहा ये “गिद्द”, 2.5 लाख, 2 लाख, 40 हजार…

नई दिल्ली। देश में हालत बद से बत्तर होते जा रहे है। और इस कठिन परिस्थिति में लोग आपसे में अवसर तलाश रहे है। गौरतलब है कि कोरोना की इस नई लहर में बेड, आईसीयू, ऑक्सिजन और दवाइयों की किल्लत सबसे ज्यादा दुखदाई है। इस पर आलम ये है कि मुनाफाखोर जीवनरक्षक मेडिसिन पर कुंडली मारे बैठे हैं। इनकी कालाबाजारी कर बीमार लोगों के परिजनों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच इस बीमारी में सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाले इंजेक्शन ‘रेमडिसिविर’ को ब्लैक करने वाले कई लोगों की धर-पकड़ कर चुकी है। लेकिन कई ऐसी मेडिसिन हैं, जो बाजार से गायब हैं। एक ऐसा ही इंजेक्शन है ‘टोसिलिजुमैब’। चालीस हजार रुपये के इस इंजेक्शन के लिए 2.5 लाख रुपये तक मांगे जा रहे हैं। मॉडल टाउन निवासी विवेक ने परिवार की महिला सदस्य को कोविड होने पर पहले तो अस्पताल में भर्ती कराने के लिए मशक्क्त की। डॉक्टरों ने रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए कहा। मार्केट में इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले अपने जानकारों, रिश्तेदारों को फोन मिलाया। जब कोई जुगाड़ नहीं मिला तो उन्होंने वॉट्सऐप ग्रुप, इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Urgently need Remedisivir का एक मैसेज खुद के फोन नंबर सहित पोस्ट किया।

उनके वॉट्सऐप और कमेंट बॉक्स में कईयों ने संपर्क करके उपलब्धता बताई। उनमें से दो तीन नंबर मिलाए। सीधे संपर्क करने के बजाय दूसरी तरफ से कहा गया कि सिर्फ वॉट्सऐप मैसेज करें। ट्रू-कॉलर पर एक नंबर असम का, दूसरा वेस्ट बंगाल का शो कर रहा था। मैसेज ड्रॉप करने पर रिप्लाई आया, मैं इंजेक्शन उपलब्ध करा दूंगा। एक इंजेक्शन के 20 हजार रुपए लगेंगे। चूंकि मारामारी है। इसलिए स्टॉक लिमिटेड है। बुकिंग के लिए एडवांस पेमेंट तुरंत करें। पैसा ऑनलाइन भेजना पड़ेगा। विवेक ने अपने जानकारों से बात की, तो उन्होंने पिछले दिनों एनबीटी की खबर का हवाला देकर ठगी के बारे में चेताया। कहा कि इंजेक्शन लेकर ही पैसे देना। दोबारा उसी नंबर पर बात की। वह कहने लगा कि मैं बिजी हूं, आप पैसा जैसे ही भेजेंगे। इंजेक्शन आपकी पास की लोकेशन पर पहुंच जाएगा। विवेक ने दो डोज के लिए एडवांस पैसों की बात की तो उसने 20 हजार रुपये तुरंत ट्रांसफर करने को कहा। विवेक ने लोकेशन पूछी और कहा कि मैं वहीं आकर ले लूंगा, लेकिन उस शख्स ने कहा कि उसके आसपास एरिया में कोविड पेशेंट हैं। इसलिए अपनी लोकेशन पर नहीं बुला सकता है। शक होने पर विवेक ने पैसे ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया।

ट्विटर के यूजर्स ने लिखा है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर रेमडेसिविर की उपलब्धता के लिए आए पोस्ट पर दिए नंबर पर कॉल किया। दूसरी तरफ से दो घंटे में इंजेक्शन का इंतजाम करने का दावा किया गया। उस शख्स ने अपने खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहा। शक होने पर जब यूजर्स ने डिटेल चेक की तो पाया कि नंबर मुंबई का न होकर आंध्र प्रदेश का था और अकाउंट नंबर किसी प्राइवेट बैंक का था। एक और यूजर ने अपने अनुभव के बारे में बताया कि कैसे अभिषेक कुमार नामक एक शख्स ने उनके साथ 28000 रुपए की धोखाधड़ी की। उसने जाइडस फार्मास्यूटिकल का कर्मचारी होने का दावा किया था और टोसिलिजुआम्ब का इंतजाम करने के नाम पर उससे 28 हजार रुपए ले लिए। इसी तरह एक अन्य यूजर ने भी लिखा है कि उसे सोशल मीडिया से एक नंबर मिला, लेकिन उसे ट्रूकॉलर पर रेमडेसिविर फ्रॉड (Remdesivir fraud) के नाम पर सेव किया गया था। जिससे वह ठगी का शिकार होने से बच गईं।

दवा कंपनियां भी अब साइबर फ्रॉड से बचने के लिए अलर्ट जारी कर रही हैं। सिप्ला ने इसके बारे में एक पब्लिक अपील भी जारी की है। कहा है कि कुछ लोग कंपनी के नाम पर फर्जी बैंक अकाउंट का झांसा देकर लोगों को ठग रहे हैं। लोग कंपनी की ओर से तय स्टॉकिस्ट या अधिकृत कारोबारी से ही दवा लें। रेमडेसिविर की कालाबाजारी और नकली पैकेजिंग के मामले भी सामने आए हैं। लोगों को भरोसेमंद से ही खरीदारी करनी चाहिए। नोटिस में कहा गया है कि दवा की कथित सप्लाई के नाम पर खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए लोगों से ठगी की जा रही है। साइबर ठग पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए नंबर से जरूरतमंदों की पहचान करते हैं। फिर उन्हें कॉल कर एडवांस जमा कराने को कहते हैं। एक बार एडवांस जमा हो जाने पर फिर फोन उठाना बंद कर देते हैं। किसी भी मेडिकल प्रोडक्ट के लिए ऑनलाइन भुगतान न करें। प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी ने रेमडेसिविर और Tocilizumab दोनों के लिए अधिकृत वितरकों की सूची जारी की हुई है। जिन्हें उनकी वेबसाइट पर देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज पर भरोसा करने से पहले, कृपया नंबर पर कॉल करें।

गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल ने पब्लिक से कहा है कि सोशल मीडिया पर कोविड से जुड़ी हेल्प के लिए अपना पर्सनल मोबाइल नंबर और डिटेल शेयर करने से बचें। क्योंकि साइबर अपराधी इसका मिसयूज कर सकते हैं। हालात यह है कि दिल्ली में अब न केवल ऑक्सिजन की किल्लत है, बल्कि कोरोना के इलाज में इमरजेंसी बेसिस पर इस्तेमाल हो रही दवाएं भी नहीं मिल रही है। रेमिडिशिवर हो फेरिपिराविर हो या फिर टोसिलिजुमैब हो, आम लोगों को खुले बाजार में आसानी से मिल नहीं रही है। सरकार के तमाम प्रयास के बाद भी इन दवाओं की कालाबाजारी जारी है। हालांकि डॉक्टर और एक्सपर्ट लगातार कह रहे हैं कि इन दवाओं का सीमित फायदा है, इसलिए होल्ड न करें, अपने मन से इस्तेमाल नहीं करें। एम्स के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने रविवार को फिर कहा कि रेमेडिशिविर कोई मैजिक नहीं है। लेकिन इसके बाद भी बाजार में ये दवाएं गायब हैं और कालाबाजारी जारी है।

टोसिलिजुमैब दवा की कालाबाजारी भी जारी है। कोविड की वजह से इन दिनों इसकी काफी डिमांड है। अर्थराइटिस के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इस दवा की कोविड के इलाज के विकल्प के तौर पर मांग बढ़ गई है। दावा है कि यह दवा एंटीबॉडी बढ़ाने में यह काम आती है। 8 हजार से लेकर 40 हजार तक इस इंजेक्शन की कीमत है। डॉक्टर का कहना है कि इससे सिर दर्द, ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। इसका इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी में की जाती है। यह इंजेक्शन अमेरिकी कंपनी रॉश करती है और भारत में इसका वितरण सिप्ला कंपनी करती है।

मुंबई में रहने वाली ममता के मामा कोविड से पीड़ित हो गए। वह नोएडा में प्राइवेट जॉब करते थे। परी चौक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। रेमडिसिविर के दो इंजेक्शन लग चुके थे, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा था। वह वेंटिलेटर पर चले गए थे। लिहाजा अस्पताल के डॉक्टरों ने एक इंजेक्शन लिख दिया, जिसका नाम था ‘टोसिलिजुमैब’। तीमारदारी कर रहे उनके छोटे मामा को नोएडा में यह नहीं मिली। ममता और उनके पति भारत ने दिल्ली में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और जानकारों से 20 अप्रैल को इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए मदद मांगी।

दिल्ली में रहने वाले रिश्तेदारों ने राजधानी में कई दवाई के डिस्ट्रीब्यूटर्स से संपर्क किया, लेकिन सब तरफ से एक जवाब आया कि दवाई स्टॉक में नहीं है। आखिरकार मेडिकल फील्ड से जुड़ी उनकी एक जानकार ने रोशनी की किरण दिखाई। इस रिश्तेदार ने दवाई कंपनी से जुड़े अपने एक परिचित से ‘टोसिलिजुमैब’ दिलाने में मदद मांगी। काफी मशक्कत करने के बाद परिचित का कॉल आया और बताया कि मार्केट में इंजेक्शन की कीमत 41 हजार रुपये के करीब है, लेकिन यह उपलब्ध नहीं है। एक जानकार डेढ़ लाख रुपये में इंजेक्शन देने को तैयार है। दिल्ली की रिश्तेदार ने मुंबई में ममता को इसकी जानकारी दी। ममता ने तुरंत हामी भर दी। इसके बाद इंजेक्शन दिलाने और देने वाले दोनों की ममता से सीधी बात होने लगी। लेकिन 21 अप्रैल को इंजेक्शन देने वाला 2.5 लाख रुपये की डिमांड करने लगा। दूसरी तरफ, नोएडा में मामा की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो डॉक्टरों ने वैकल्पिक इंजेक्शन मंगवा लिया। ऐसे में ‘टोसिलिजुमैब’ की डिलिवरी नहीं हो सकी। लेकिन दो दिन बाद ममता के मामा ने दम तोड़ दिया, जो महज 52 साल के थे।

क नामी एडवोकेट यमुनापार के अस्पताल में भर्ती हैं। पहले तो रेमडिसिविर के इंजेक्शन ब्लैक में लिए, जो 20-20 हजार के पड़े। इसके बाद डॉक्टरों ने 18 अप्रैल को ‘टोसिलिजुमैब’ लाने को कह दिया। वकील साहब के परिचितों ने दिल्ली में कई जगह पता किया, लेकिन नहीं मिली। उनके करीबी ने बताया कि काफी भागदौड़ करने पर कुछ लोगों ने 2 से 2.5 लाख रुपये की डिमांड की, लेकिन इंजेक्शन भिजवाने के लिए समय मांगा। डॉक्टरों का कहना था कि जल्दी चाहिए, इसलिए एडवोकेट के कुछ परिचितों ने हैदराबाद से दो इंजेक्शनों का इंतजाम करवा दिया। करीबी ने बताया कि फिलहाल वकील साहब स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और पहले से बेहतर हैं।

राजधानी समेत कई राज्यों में ऑक्सिजन की कमी है। न तो अस्पतालों में ऑक्सिजन मिल रही है, न ही मार्केट में लोगों को ऑक्सिजन सिलिंडर मिल रहे हैं। अब ऑक्सिजन कंसन्ट्रेटर भी आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। हालांकि, अब सरकार की तरफ से ऑक्सिजन कंसन्ट्रेटर और कोविड से जुड़े इलाज में इस्तेमाल होने वाले इक्विपमेंट्स पर लगने वाले सेस में छूट दी जा रही है। जल्द ही मार्केट से इनकी कमी दूर हो जाएगी। ऑक्सिजन कंसन्ट्रेटर का घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है।

कोरोना संक्रमण से नोएडा-ग्रेनो बुरी तरह प्रभावित है। ऐसे में कुछ लोग महामारी को अवसर समझकर मोटा मुनाफा कमाने में जुटे हैं। शहर में ऑक्सिजन सिलिंडर और ऑक्सिमीटर को रेट से 10 से 15 गुना अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। दूसरी तरफ लोग ऑक्सिजन सिलिंडर भरवाने के लिए फैक्ट्रियों के चक्कर काट रहे हैं। अब वहां सिलिंडर भरने से इनकार किया जा रहा है। इसके चलते घरों में आइसोलेटेड मरीजों को ऑक्सिजन नहीं मिलने पर दम घुटने लगा है। लोगों का आरोप है कि ऑक्सिजन सप्लायर एक सिलिंडर 25 से 30 हजार रुपये में दे रहे हैं, जबकि सिलिंडर की कीमत 4 हजार से लेकर 8 हजार रुपये है। इसी तरह ऑक्सिमीटर की कीमत 800 से लेकर 1000 रुपये है। इसे भी दुकानदार 5 हजार से 6 हजार रुपये में बेच रहे हैं। दादरी के रहने वाले अरुण कुमार ने बताया कि ऑक्सिजन सिलिंडर व ऑक्सिमीटर एक वेंडर ने अपनी दुकान से अलग दूसरे एरिया में जा कर दिया है ताकि उसकी पहचान न हो सके।

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