इस अध्ययन से पहले अनुमान था कि भारत में करीब 22 लाख तपेदिक के मामले हो सकते हैं, जो दुनिया भर के तपेदिक मामलों का एक-तिहाई है। दुनिया भर में करीब 63 लाख तपेदिक के मरीज होने का अनुमान है। अध्ययन में पता चला कि निजी क्षेत्र जहां टीबी इलाज में मदद करता है। वहीं, अवरोध भी उत्पन्न करता है। हालांकि भारत में टीबी का मानकीकृत इलाज केवल सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा किया जाता है। लेकिन इसका समय पर पता लगाना और निदान करना अनियमित निजी स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़े पैमाने पर उपस्थिति के कारण संभव नहीं हो पा रहा है। अध्ययन में कहा गया है, टीबी की जांच का मुकम्मल ढांचा नहीं होने और इलाज में देरी के कारण भारत में टीबी खत्म होने का नाम नहीं ले रही।






