मशहूर डॉक्टर ने कालाबाजारी को दिया बढ़ावा, कोरोना महामारी के दौर में 4 हजार की दवा 40 हजार में बेची

लखनऊ। कोरोना महामारी के दूसरे दौर में जब पूरे देश में हाहाकार मचा था, उस वक्त जहां एक ओर लोग दूसरों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं, वहीं डॉक्टर अल्तमश हुसैन गाजियाबाद में रेमडेसिविर की कालाबाजारी में मगन था। देश के मशहूर डॉक्टरों में शुमार इस डॉक्टर ने कोरोना महामारी के दौर में मरीजों को 4 हजार की दवा 40-40 हजार रुपये में बेची थी। पुलिस ने उसके दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार कर घंटाघर थाने में केस दर्ज कर जेल भेज दिया था। पुलिस के मुताबिक पूरे रैकेट का डॉ. अल्तमश हुसैन सरगना है।

कोतवाली थाना क्षेत्र के नवलपुर गांव निवासी डॉ अल्तमश कम समय में देश का नामी न्यूरोलॉजिस्ट बन गया। कुछ दिनों से वह दिल्ली के निजामुद्दीन में निजी मकान बनवाकर रहता है। वह एक बड़ी फार्मा कंपनी का सीईओ भी है और दिल्ली एम्स में भी सेवाएं देता रहा है। अपने संपर्क और नाम की वजह से ये आसानी से रेमडेसिविर इंजेक्शन व दूसरे महंगे इंजेक्शन हासिल कर लेता था। फिर इसके गैंग के लोग मरीजों तक पहुंचते थे और सौदा करते थे। इंजेक्शन केवल उसी को दिया जाता था, जो इनके लिंक के जरिए आते थे। अनजान लोगों से कोई बात नहीं होती थी। 4 हजार में मिलने वाला इंजेक्शन इन्होंने कोरोना महामारी के दौर में 40-40 हजार रुपये में बेचा और चंद ही दिनों की कालाबाजारी में 36 लाख रुपये कमाए।

हालांकि गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले में डॉक्टर समेत तीन लोगों को 29 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार कर घंटाघर थाने में केस दर्ज किया था। इस मामले में वहां करीब 9 दिनों तक जेल के सलाखों के अंदर रहा। 8 मई को उसकी रिहाई हो गई। रिहाई के बाद उसने एक बार फिर अपनी कालाबाजारी धड़ल्ले से शुरू कर दी। ब्लैक फंगस व कोरोनावायरस से संबंधित इंजेक्शन समेत दूसरी जीवनरक्षक नकली दवाइयों ब्रांडेड लेबल लगाकर बेचने का काम शुरू कर दिया। इसी प्रकार 250 रुपए के इंजेक्शन पर ब्लैक फंगस का लेबल लगाकर 12 सौ रुपये में बिक्री करता था।

यह सभी बातें दिल्ली पुलिस के जानकारी में आयी तो उसे एक बार फिर गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। यूपी और बिहार में डॉ अल्तमश की कंपनी की दवा बेची जाती थी। यूपी और बिहार के विभिन्न जिलों में डॉक्टर अल्तमश एंड कंपनी की दवा को भारी मात्रा में खपाया जाता था। बरहज व नवलपुर में तो डॉक्टर खुद अपनी दवा को लिखकर मेडिकल स्टोर से दिलवाता था। इसके अलावे देवरिया, आजमगढ़ समेत बिहार में दवा भेजी जाती थी। देवरिया में कई अस्पतालों के डॉक्टरों का उससे तार जुड़ा हुआ है। डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद उसकी कंपनी की दवा बेचने वाले व्यावसायियों व ड्रग रैकेट में शामिल लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।

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