विदेश में छाया भारतीय फार्मा उद्योग

मुंबई/अहमदाबाद। प्रमुख फार्मा डॉ. रेड्डीज, सिप्ला और ल्यूपिन समेत अन्य दवा कंपनियां पड़ोसी देश चीन में अपना कारोबार बढ़ाने में लगी हैं। विश्व के दूसरे सबसे बड़े दवा बाजार में भारत का करीब 16 करोड़ डॉलर का औषधि निर्यात इन कंपनियों की बिक्री का एक हिस्सा है। भारतीय कंपनियों को चीन में कानूनी बदलाव और वृद्धि की संभावनाओं के चलते लाभ मिल रहा है। चीन के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल ही में विदेशी परीक्षण आंकड़ों पर गौर करने और दवाओं की मंजूरी में तेजी के लिए अधिक लोगों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। चीन के औषधि नियामक की इस पहल से भारतीय औषधि विनिर्माताओं को फायदा हो सकता है। ईवाई के वैश्विक लीडर (उभरते बाजार- लाइफसाइंसेज) श्रीराम श्रीनिवासन का कहना है कि भारतीय कंपनियां पारंपरिक तौर पर अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पर ध्यान केंद्रित करती रही हैं लेकिन चीन में नए कानून के तहत यूएस एफडीए द्वारा मंजूर दवाओं को फास्ट-ट्रैक मंजूरी दी जाएगी। इससे भारतीय कंपनियों को वहां अपना पांव जमाने में मदद मिलेगी। वहीं, डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि वह चीन में कैंसररोधी दवा उतारने की योजना बना रही है। सिप्ला और वॉकहार्ट वहां एंटीबायोटिक्स और श्वसन रोग के उपचार वाली दवाओं को उतारने की फिराक में है। कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष एमवी रमण ने कहा कि हम कैंसररोधी दवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। चीन के बाजार में अपनी वाणिज्यिक मौजूदगी बढ़ाने के लिए साझेदारी की भी संभावनाएं तलाश रहे हैं।

डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज चीन में कनाडा की कंपनी रोटम ग्रुप के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए दवाओं का विनिर्माण एवं बिक्री करती है। इस संयुक्त उद्यम की बिक्री एवं विपणन टीम की पहुंच चीन के 5,000 से अधिक अस्पतालों तक है। वैश्विक स्वास्थ्य सेवा फर्म आईक्यूवीआईए के अनुसार कंपनी चीन में करीब 2 करोड़ डॉलर मूल्य की दवाओं की बिक्री करती है। हालांकि इसमें एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट्ïस की बिक्री शामिल नहीं है। बता दें कि डॉ. रेड्डीज चीन के बाजार में करीब 20 साल से मौजूद है। सन फार्मास्युटिकल्स द्वारा 2014 में अधिग्रहीत प्रमुख औषधि कंपनी रैनबैक्सी ने 2009 में चीन के अपने संयुक्त उद्यम से हिस्सेदारी बेचकर बाहर हो गई थी। टॉरंट ने नियामकीय सख्ती के कारण चीन में अपनी दवाएं उतारने की योजना को टाल दिया था। उधर, सिप्ला करीब तीन साल पहले चीन के अपने दो निवेश से बाहर हो गई थी। लेकिन यह कंपनी प्रमुख दवा बाजार में नए सिरे से दांव लगाने की तैयारी में है। वॉकहार्ट चीन में अपनी एंटीबायोटिक्स दवा उतारने की योजना बना रही है और क्लीनिकल परीक्षण के लिए वह स्थानीय कंपनियों से बातचीत कर रही है। बताया गया है कि कंपनी 5 एंटीबायोटिक दवा विकसित करने में जुटी है।

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