हैदराबाद। रेबीज वैक्सीन को गलत जगह पर लगाने से जान भी जा सकती है। इस बारे में चिकित्सकों ने अलर्ट किया है। कुत्ते के काटने पर तुरंत मेडिकल मदद की ज़रूरत होती है। बच्चों की डॉक्टर डॉ. शिवरंजनी संतोष ने चेताया है कि हिप्स या ग्लूटियल हिस्से में रेबीज़ वैक्सीन लगाना खतरनाक है। उन्होंने कहा कि रेबीज़ वैक्सीन कभी भी हिप्स में नहीं लगानी चाहिए। उस हिस्से में फैट की मोटी परत होती है।

वैक्सीन को इस फैट में इंजेक्ट किया जाता है, तो शरीर इसे ठीक से एब्ज़ॉर्ब नहीं कर पाएगा। इससे वैक्सीन फेल हो सकती है। रेबीज़ जैसी बीमारी मे ऐसा फेल होना मौत बनता है। वैक्सीन मांसपेशियों तक अच्छे से पहुंचे, यह मरीज़ की उम्र पर निर्भर करता है। छोटे बच्चों और टॉडलर्स को जांघ के अगले हिस्से में इंजेक्शन लगाना चाहएि। । वहीं, बड़ों को यह ऊपरी बांह या कंधे की डेल्टॉइड मसल में लगना चाहिए।

डॉ. शिवरंजनी ने बताया कि वैक्सीन को सही लंबाई की सुई से भी देना चाहिए। इससे वह ज़रूरी गहराई तक पहुँच सकेगी। डॉक्टरों ने बताया कि गंभीर कैटेगरी 3 के काटने पर सिर्फ़ वैक्सीन काफ़ी नहीं है। इसके साथ रेबीज़ इम्यूनोग्लोबुलिन भी होना चाहिए। इसमें रेडी-मेड एंटीबॉडी होते हैं। इन्हें वायरस को नसों तक पहुँचने से पहले जल्द सीधे घाव में इंजेक्ट किया जाना चाहिए। अगर किसी बच्चे ने रेबीज़ का पूरा शेड्यूल पूरा कर लिया है, तो वे तीन महीने तक सुरक्षित रहते हैं। अगर इस समय के बाद कोई काटता या खरोंचता है, तो उन्हें दो बूस्टर डोज़ की ज़रूरत होती है।