नई दिल्ली। भारतीय दवा कंपनियों को ब्राज़ील और नाइजीरिया में बेहतर निर्यात मिला है। बीते वित्त वर्ष में भारतीय औषधि निर्यात ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इसमें 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। इस तरह यह यह 20.48 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। इस वृद्धि में ब्राज़ील और नाइजीरिया जैसे देशों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

नाइजीरिया ने विशेष रूप से 179 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि दिखाई। वहीं, ब्राज़ील में भी भारतीय दवाओं के आयात में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई। यह रुझान भारतीय जेनेरिक दवाओं की बढ़ती पहुँच को दर्शाता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के नवीनतम आँकड़ो में यह जानकारी दी गई। इसके अनुसार, ब्राज़ील और नाइजीरिया भारतीय औषधि उत्पादों के प्रमुख निर्यात गंतव्य के रूप में उभर रहे हैं।

अप्रैल-नवंबर 2025-26 की अवधि में भारत के फार्मा निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। नाइजीरिया भारतीय फार्मा उत्पादों के लिए सबसे तेज़ी से बढ़ते निर्यात में शामिल रहा। इस अवधि में लगभग 179 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान दिया। यह कुल निर्यात वृद्धि का 14 प्रतिशत से अधिक है।

ब्राज़ील में भी भारत से औषधि आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। यहाँ लगभग 100 मिलियन डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। यह वहाँ के बड़े और विकसित होते स्वास्थ्य बाज़ार में मजबूत मांग को प्रतिबिंबित करती है। यह वृद्धि भारतीय फार्मा उद्योग की मजबूती, लचीलापन और वैश्विक बाज़ारों में उसके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के फार्मा निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा। इसकी हिस्सेदारी कुल निर्यात में 31 प्रतिशत से अधिक रही। फ्रांस, नीदरलैंड्स, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भी स्थिर निर्यात हिस्सेदारी के साथ योगदान दिया।