इंदौर (मध्यप्रदेश)। नकली दवा का जखीरा बरामद होने का मामला प्रकाश में आया है। संबंधित 4 ड्रग इंस्पेक्टर्स को कारण बताओ नोटिस सौंपे हैं। शहर से छत्तीसगढ़ के जिलों में फर्जी बिल के सहारे नकली दवाइयां ट्रांसपोर्ट की गई हैं। नकली दवाइयों की 7वीं खेप पकड़ाई तब खुलासा हुआ। पता चला कि करोड़ों की नकली दवाइयों की 6 खेप पहले से खपाई जा चुकी है। चार स्पेशल अफसरों की जांच में इसका खुलासा हुआ है। अफसरों ने ड्रग माफिया के ठिकानों पर छापेमारी की है।
ड्रग इंस्पेक्टर्स की मिलीभगत
बिजासन मेडिकल स्टोर ने भाठापारा की प्रेम प्रकाश एजेंसी और सारंगढ़ के सरस्वती मेडिकल स्टोर को फर्जी बिल से मेडिसिन भेजी थी। इनमें कई दवाइयां नकली हैं। माफिया ट्रांसपोर्ट में एंटीबायोटिक दवाइयां लोड करवाते थे। जबकि बिल दर्द निवारक दवाइयों का होता था। इस रैकेट का खुलासा ड्रग इंस्पेक्टर्स की मिलीभगत के बाद हुआ है। 50 लाख की बिना लाइसेंस वाली दवाइयां पकड़ी गईं। सिर्फ 2.24 लाख रुपए की जब्ती बनाई गई। बाकी दवाइयां कारोबारी के घर में छिपा दी गईं। गोदाम का वीडियो सामने आया, तब दोबारा जांच हुई। पता चला है कि कारोबारियों के तार इंदौर से जुड़े हैं।
4 ड्रग इंस्पेक्टर्स को नोटिस
रायपुर और रायगढ़ के 4 ड्रग इंस्पेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। रायपुर के ईश्वरी नारायण सिंह और नीरज साहू, रायगढ़ में अमित राठौर और विजय राठौर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इन्होंने लाखों की दवाइयों की जब्ती नहीं बनाई। सिर्फ 2.24 लाख की जब्ती बनाई थी।










