नई दिल्ली। दवा उत्पादन का लाइसेंस लेने के लिए देश में एक जैसे नियम होंगे। इसके लिए दवा कंपनियों को एक ही बार में सभी दस्तावेजों का पूरा डोजियर देना होगा। इसमें दवा की जांच रिपोर्ट, गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभाव और उत्पादन से जुड़ी जानकारी होगी। इस डोजियर की जांच के बाद ही औषधि नियंत्रक विभाग लाइसेंस देने संबंधी सिफारिश करेगा।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सभी राज्य औषधि नियंत्रकों को डोजियर आधारित प्रणाली लागू करने का आदेश दिया है। उत्तर प्रदेश एफडीए को मार्गदर्शन दस्तावेज भी साझा किया है। अलीगढ़ जिला औषधि नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इस व्यवस्था से घटिया दवाओं की जांच प्रक्रिया व्यवस्थित होगी। साथ ही, दवा कंपनियों की जवाबदेही भी तय होगी।

हालांकि यह आदेश आयुष दवाएं, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन पर लागू नहीं रहेगा। दरअसल, अब तक अलग-अलग राज्यों में दवा लाइसेंस देने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। इससे गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पिछले वर्ष कफ सिरप से बच्चों की मौत मामले में नियमों के खिलाफ लाइसेंस देने का मामला सामने आया था। राज्य स्तर पर कंपनियों को दवा लाइसेंस दिया जाता है। इससे पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल भी खड़े हो रहे हैं।