अमरोहा (उप्र)। मेडिकल लाइसेंस के नियमों में ड्रग विभाग ने ब्रेक लगा दिए हैं। नशीली दवाओं की खरीद-फरोख्त के मामले सामने आए हैं। इसके बाद औषधि विभाग सख्त हो गया है। बाहरी लोगों के लिए विभाग से लाइसेंस पाना अब आसान नहीं होगा।

अभिलेखों पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी नहीं होगा।

पहले विभाग संबंधित व्यक्ति की पुलिस से जांच कराएगा। उसकी रिपोर्ट मिलने के बाद अपने स्तर से भी जांच-कार्य करेगा। इसके बाद ही किसी को लाइसेंस जारी करेगा। नशीली दवाओं के मामले पकड़े जाने के बाद उठाया है।

नशीली दवाओं के सौदागर जनपद में फर्जी नाम व पते के आधार पर मेडिकल स्टोर के लाइसेंस जारी करवा रहे हैं। ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। हरियाणा व हिमाचल प्रदेश में मेडिकल स्टोरों पर छापे के दौरान अमरोहा का नाम सामने आ चुका है। यहां के मेडिकल स्टोरों के नाम से दवाईयां खरीदकर बिलिंग किए जाने की पुष्टि हो चुकी है।
दूसरे राज्यों का नाम व पता दर्शाकर सौदागर इस काम को अंजाम दे रहे हैं। हसनपुर तहसील क्षेत्र के बिजौरा में यश फार्मा मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त हो चुका है।

उसका संचालक अवनीश कुमार निवासी जीबी-8ए, पाल पहलादपुर डाक बदरपुर दिल्ली का रहने वाला है। दूसरे राज्यों में छापे में नाम उजागर होते ही संचालक मेडिकल स्टोर बंद कर फरार हो जाते हैं। विभाग उनको नोटिस भेजता है लेकिन, फर्जी पता होने के बाद नोटिस ही वापस आ जाते हैं। औषधि विभाग निरीक्षक रुचि बंसल ने कहा कि गैर प्रदेशों के लोग यदि जनपद में मेडिकल स्टोर खोलना चाहते हैं तो उससे पहले उनका पुलिस वेरीफिकेशन कराया जाएगा। पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद विभाग भी अपने स्तर से जांच-पड़ताल कराएगा। इसके बाद ही मामले में अगला निर्णय लिया जाएगा।