भीलवाड़ा। पैरासिटामोल टेबलेट की कीमतों में 47 फीसदी का उछाल आ गया है। अब इलाज कराना भी महंगा हो चला है। इसके पीछे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर माना गया है। दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) और सर्जिकल आइटम्स की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इससे मरीजों के इलाज का कुल बजट 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

राहत की बात यह रही कि मार्च में स्टॉक होने से काम चल गया। अप्रैल में नई दरों का बोझ आम जनता पर पड़ेगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 900 से अधिक दवाओं की कीमतों में 0.65 प्रतिशत की वृद्धि की थी। धरातल पर स्थिति अलग है। कच्चे माल की लागत बढऩे से उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
एपीआई के दाम में 25 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत में 47 प्रतिशत तक इजाफा हुआ। युद्ध के कारण शिपिंग और इंश्योरेंस चार्ज बढ़ गए हैं। कच्चा माल लाने वाले जहाजों का समय दोगुना से अधिक हो गया है। अब 30-40 दिन की जगह 80-90 दिन लग रहे हैं। माल ढुलाई की दरें दोगुनी होने, ट्रांसपोर्टेशन, डीजल, पीएनजी की कीमतों ने बढ़ाई है। दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला पीवीसी के दाम 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।










