हैदराबाद (तेलंगाना)। CDSCO पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक कानून के यांत्रिक और अविवेकी प्रयोग की कड़ी निंदा की है।
यह आदेश हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स के पूर्व जोनल मैनेजर एके गुप्ता की याचिका पर पारित किया गया था।

अभियोजन पक्ष ने मार्च 2012 में औषधि अधिकारियों द्वारा दर्ज कराई शिकायत पर कार्रवाई की। इसमें आरोप लगाया गया था कि लालागुडा स्थित दक्षिण मध्य रेलवे अस्पताल को आपूर्ति की गई कुछ दवाएं घटिया गुणवत्ता की थीं। यह मामला 2010 में लिए गए रोक्सीथ्रोमाइसिन टैबलेट आईपी 150 मिलीग्राम के सैंपल से संबंधित था। इन्हें बाद में औषधि प्रयोगशाला द्वारा अमानक घोषित कर दिया गया था। इस पर अधिकारियों ने औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू की।

हालांकि, न्यायालय ने एक मूलभूत खामी देखी। विचाराधीन दवा का निर्माण मार्च 2009 में किया गया था। जबकि याचिकाकर्ता 31 जनवरी 2009 को पहले ही सेवानिवृत्त हो चुका था। इसके बावजूद उसे आरोपी संख्या 1 के रूप में नामित किया गया था। न्यायमूर्ति जुकांती ने टिप्पणी की कि उस व्यक्ति पर आपराधिक दायित्व थोपना तर्क के विपरीत है। यह स्पष्ट रूप से दिमाग का उपयोग न करने को दर्शाता है।

न्यायालय ने माना कि ठोस सबूतों के बिना अभियोग शुरू करना कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। आपराधिक कानून को क्रियान्वित करना व्यक्ति की स्वतंत्रता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। न्यायालय ने चेतावनी दी कि वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करने वाले अधिकारियों को उचित सावधानी और जिम्मेदारी के साथ ऐसा करना चाहिए। कोर्ट उन अधिकारियों के कार्यों का समर्थन नहीं कर सकता जो बिना उचित आधार के व्यक्तियों को संलिप्त करने की जल्दबाजी करते हैं।

याचिकाकर्ता को हुई अनावश्यक कठिनाई को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने संबंधित औषधि अधिकारियों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। उन्हें निर्देश दिया कि यह राशि चार सप्ताह के भीतर अदा की जाए। यह जुर्माना मुआवजे के साथ-साथ भविष्य में इसी तरह की चूक को रोकने के लिए भी लगाया गया था।