सरायकेला (झारखंड)। एक फार्मासिस्ट के लाइसेंस पर कई मेडिकल स्टोर संचालन का भंडाफोड़ हुआ है। सिविल सर्जन कार्यालय ने सभी निजी दवा दुकानों को पंजीकृत कराने की कवायद तेज कर दी है। जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया कई तकनीकी और व्यावहारिक बाधाओं से जूझ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एक पंजीकृत फार्मासिस्ट के प्रमाण-पत्र पर केवल एक दवा दुकान संभव है। जिले में ऐसे कई मामले हैं, जहां एक ही प्रमाण पत्र पर एक से अधिक दवा दुकानें हैं। हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री पोर्टल एक फार्मासिस्ट को एक ही संस्थान से जोडऩे की अनुमति देता है। इससे अन्य दुकानों का पंजीकरण अटक रहा है। इस संबंध में दवा दुकानों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश भी जारी किया गया है।
डेडलाइन खत्म, फिर भी एचपीआर से नहीं जुड़ पाईं दवा दुकानें
सिविल सर्जन ने अस्पतालों, पैथोलॉजी, क्लीनिक और दवा दुकानों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। जानकारी अनुसार 44 गैर-सरकारी अस्पतालों सहित 10 सरकारी अस्पतालों का पंजीकरण हो चुका है। 11 पंजीकृत पैथोलॉजी केंद्र और 103 निजी क्लीनिक भी इस प्रणाली से जुड़ चुके हैं। अब विभाग का ध्यान दवा दुकानों के पंजीकरण पर है। सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद ने कहा कि शत-प्रतिशत पंजीकरण अनिवार्य है। इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।










