आगरा (उप्र)। बंद दवा फर्म से तस्करी का मामला प्रकाश में आया है। 450 दवा लाइसेंसधारक औषधि विभाग के रडार पर आए हैं। दवाओं की तस्करी-कालाबाजारी के लिए माफिया बंद फर्म का सहारा ले रहे हैं। मामले पकड़ में आने के बाद थोक के 450 लाइसेंसधारक विभाग के रडार पर आ गए हैं। ऑडिट कराते हुए इनकी जांच शुरू हो गई है।
यह है मामला
जिले में थोक दवाओं के 3100 लाइसेंसधारक हैं। बीते माह फव्वारा में सैंपल, नकली और सरकारी दवाओं की तस्करी पकड़ी गई थी। बंद फर्म के नाम पर बिलिंग दिखाकर ये खेल चल रहा था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने थोक दवाओं के लाइसेंस जांचने के आदेश दिए हैं। अब विभाग के रडार पर जिले के करीब 450 लाइसेंसधारक आ गए हैं।
इनकी जांच की जा रही है। इनमें से कई ऐसी फर्में हैं, जहां दवाओं का भंडारण नहीं है। कुछ दवाएं रखकर खानापूर्ति की जा रही है। जबकि फर्म से लाखों रुपये का कारोबार दर्शाया जा रहा है। इसका रिकॉर्ड जीएसटी विभाग से भी जुटाया जा रहा है। जांच में पता चला कि ये फर्में महीने में एक-दो बार ही खुलती हैं। फर्म पर पूर्ण विवरण भी नहीं है। लखनऊ मुख्यालय की टीम ने ऐसे फर्मों के ऑडिट के लिए सहायक आयुक्त को निर्देश दिए हैं। इसके लिए औषधि निरीक्षक चरणबद्ध इनकी जांच करते हुए रिपोर्ट बनाएंगे।
इसे शासन को भेजा जाएगा। कई ऐसे फर्में हैं, जिनके संचालक लाइसेंस लेकर प्रतिष्ठान को बंद रखते हैं। इसके बावजूद कारोबार लाखों रुपये दर्शाया जा रहा है। ऐसे में पूर्व की जांचों में डमी फर्म के नाम पर दवाओं के कारोबार में गड़बड़ी मिली है। दवाओं के थोक लाइसेंसधारकों की जांच की जा रही है।










