लखनऊ (उप्र)। नकली दवाओं के कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने अमीनाबाद थाने में चार फर्म संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि इन लोगों ने नकली और काउंटरफिट थ्रोंबोफोब ऑइंटमेंट 20 ग्राम की खरीद-बिक्री की। 24 हजार ट्यूब दवा का स्टॉक और उसके खरीद संबंधी बिल भी नहीं मिले। पुलिस ने राकेश कुमार, अविनाश चौधरी, ऋषभ कश्यप और सनी कश्यप के खिलाफ केस दर्ज किया है।

दवा निर्माता कंपनी की शिकायत से खुला राज

दवा निर्माता कंपनी जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड ने शिकायत दी थी। बताया कि बाजार में उसकी थ्रोम्बोफोब ऑइंटमेंट 20 ग्राम की नकली दवा बेची जा रही है। शिकायत के बाद औषधि निरीक्षकों ने कई फर्मों में निरीक्षण किया। अमीनाबाद स्थित मेसर्स शिव शक्ति फार्मा ने महाराजा इंटरप्राइजेज से उक्त दवा की खरीद दिखाई थी। बाद में 24 हजार ट्यूब दवा वापस करने के लिए डेबिट नोट भी जारी किया गया। जांच में खरीद-बिक्री से जुड़े कई रिकॉर्ड और बिलों में विसंगतियां मिलीं। संबंधित फर्में दवा खरीद के मूल बिल, स्टॉक रजिस्टर आदि उपलब्ध नहीं करा सकीं। इससे दवा की सप्लाई चेन और स्रोत की पुष्टि नहीं हो सकी।

जांच में सामने आया कि राकेश कुमार, अविनाश चौधरी, ऋषभ कश्यप और सनी कश्यप ने मिलकर नकली/काउंटरफिट दवा की खरीद-बिक्री का नेटवर्क तैयार किया। आरोप है कि फर्जी बिल तैयार कर दवाओं को बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ कमाया गया। विभाग ने मामले को आपराधिक श्रेणी का मानते हुए एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की। अमीनाबाद थाने में चारों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना एसआई अंगद कुमार यादव को सौंपी गई है।