झज्जर (हरियाणा): हरियाणा के झज्जर स्थित सिविल अस्पताल में जांच में लापरवाही का एक मामला सामने आया है। अस्पताल में एक महिला मरीज का अल्ट्रासाउंड करने के बाद विशेषज्ञ ने पथरी न होने की बात कही, लेकिन करीब आधे घंटे बाद एक निजी अस्पताल में दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने पर 8.8 मिलीमीटर की पथरी सामने आई। मरीज के परिवार ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री को भेजी है।

पेट दर्द से परेशान थी महिला

मरीज के पति, जो स्थानीय पार्षद हैं, ने बताया कि उनकी पत्नी के पेट में कुछ समय पहले दर्द हुआ था। उस समय सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्हें निजी अस्पताल में जांच करानी पड़ी थी। हाल ही में दोबारा दर्द होने पर वे पत्नी को सिविल अस्पताल लेकर आए, जहां अल्ट्रासाउंड के बाद पथरी न होने की बात कही गई।

परिवार को इस रिपोर्ट पर यकीन नहीं हुआ, क्योंकि महिला दर्द से परेशान थी। आधे घंटे बाद निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने पर 8.8 मिलीमीटर की पथरी की पुष्टि हुई। परिवार ने इसे अस्पताल की लापरवाही बताते हुए कहा कि ऐसी गलती किसी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है।

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में अंतर क्यों आ सकता है

रेडियोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, अल्ट्रासाउंड एक ऑपरेटर-निर्भर जांच है, यानी इसके नतीजे काफी हद तक जांच करने वाले डॉक्टर के अनुभव और मशीन की गुणवत्ता पर निर्भर करते हैं। आंतों में गैस, मरीज की तैयारी (जैसे पेशाब की थैली भरी होना) और पथरी की स्थिति भी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि 8.8 मिमी जैसी पथरी आमतौर पर अच्छी तरह दिख जाती है, इसलिए दोनों रिपोर्ट में इतना बड़ा अंतर जांच का विषय है।

पथरी के लक्षण

  • कमर या पेट के एक तरफ तेज दर्द, जो नीचे की ओर जा सकता है
  • पेशाब में जलन या खून आना
  • बार-बार पेशाब आना
  • जी मिचलाना या उल्टी
  • संक्रमण होने पर बुखार और कंपकंपी

मरीजों के लिए सलाह

  • अगर लक्षण बने रहें और रिपोर्ट सामान्य आए, तो डॉक्टर से दोबारा जांच या दूसरी राय लेने में संकोच न करें।
  • अल्ट्रासाउंड से पहले बताई गई तैयारी, जैसे खाली पेट रहना या पानी पीना, का पालन करें।
  • सभी जांच रिपोर्ट संभालकर रखें और डॉक्टर को पुरानी रिपोर्ट भी दिखाएं।
  • जांच में गड़बड़ी की आशंका हो तो अस्पताल प्रशासन, सीएमओ या स्वास्थ्य विभाग में लिखित शिकायत करें।

सरकारी अस्पतालों में जांच की गुणवत्ता पर लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में सुधार किया जाए।

स्रोत: अमर उजाला (1 अक्टूबर 2026)