बेंगलुरु। प्रिस्क्रिप्शन दवाओं (शेड्यूल H, H1 और X) के विज्ञापन पर केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी को दवा दुकानों, थोक विक्रेताओं और वितरकों तक लागू करने का प्रस्ताव अभी अधूरा है। यह कहना है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और CDSCO के पूर्व राष्ट्रीय सलाहकार (ड्रग्स कंट्रोल) और कर्नाटक के पूर्व ड्रग्स कंट्रोलर डॉ. बी.आर. जगशेट्टी का।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को मसौदा अधिसूचना G.S.R. 861(E) जारी की थी। इसमें ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 65 में नया उप-नियम (22) जोड़ने का प्रस्ताव है। अभी तक यह शर्त केवल निर्माताओं के लाइसेंस पर लागू होती है, इसलिए दुकानों के होर्डिंग, डिस्काउंट ऑफर, ऑनलाइन लिस्टिंग और मैसेजिंग अभियान इसके दायरे से बाहर थे। डॉ. जगशेट्टी ने इस खामी को दूर करने की कोशिश का समर्थन किया है।
हालांकि उनका कहना है कि मसौदे में ‘विज्ञापन’ की परिभाषा नहीं दी गई है। यह साफ नहीं है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की सामग्री, ब्रांड रिमाइंडर और रोग-जागरूकता अभियान इसके दायरे में आएंगे या नहीं। मंजूरी देने वाली संस्था, प्रक्रिया, समय-सीमा और अपील का भी कोई जिक्र नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार का मकसद आम जनता के लिए ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाना है, तो स्पष्ट प्रतिबंध लगाया जाए और केवल डॉक्टरों के लिए होने वाले पेशेवर संवाद को सीमित छूट दी जाए। साथ ही ई-फार्मेसी, आयात और शेड्यूल X लाइसेंस धारकों पर भी नियम लागू होने की बात स्पष्ट हो।
