नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर के सभी मेडिकल स्टोर्स पर CCTV निगरानी अनिवार्य करने के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद शेड्यूल H, H1 और X की दवाओं की बिना पर्चे बिक्री पर रोक लगाना और दवा आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ाना है।
प्रस्ताव के तहत प्रिस्क्रिप्शन दवाएं बेचने वाली लाइसेंसशुदा फार्मेसियों को बिक्री की CCTV रिकॉर्डिंग रखनी होगी और फुटेज को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखना होगा।
हालांकि दवा व्यापार संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। उनके अनुसार 6 से 8 कैमरे, रिकॉर्डिंग यूनिट, स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट और रखरखाव का खर्च प्रति दुकान 50,000 से 1 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है। छोटे कस्बों और गांवों में बिजली कटौती, कमजोर इंटरनेट और तकनीशियनों की कमी भी बड़ी समस्या है। व्यापारियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ बढ़ने की भी आशंका है।
मसौदे पर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि कैमरे क्या रिकॉर्ड करेंगे और फुटेज तक किसकी पहुंच होगी। सुझाव दिया जा रहा है कि निगरानी केवल बिलिंग काउंटर तक सीमित रहे, ऑडियो रिकॉर्ड न हो और मरीजों की गोपनीयता DPDP एक्ट, 2023 के तहत सुरक्षित रहे। साथ ही नियम को केवल H1, X और नशीली दवाओं तक सीमित करने और छोटे व ग्रामीण केमिस्टों को अधिक समय व सब्सिडी देने की मांग उठी है।
