नई दिल्ली। मरीज से ज्यादा पैसे वसूलने वाले अस्पतालों पर शिकंजा कसा जाएगा। सब जानते हैं कि अस्पतालों में मरीज से पैसे एंठे जाते हैं। चाहे वो टेस्ट के नाम पर हो या ऑपरेशन-दवा के नाम पर।
केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में स्वीकारा है कि अस्पताल मरीजों से दवाओं पर ज्यादा एमआरपी वसूलते हैं। रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि सरकार इस समस्या से अवगत है। इसकी जांच की जा रही है। सभी हितधारकों से सलाह-मशविरा कर उचित कदम उठा रहे हैं। सभी दवाओं और चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों की कीमतों पर कैप लगाने का मुद्दा है। मरीजों की अस्पतालों के मुकाबले सौदेबाजी की स्थिति बहुत कमजोर होती है। इसके चलते कई तरह की कुप्रथाएं पनपती हैं। भारत में सस्ती दवाएं बनाने वाली कंपनियां हैं। लेकिन यहां मरीजों को विनिर्माण कीमत से कहीं ज्यादा चुकाना पड़ता है।
कहा गया कि भारतीय दवा बाजार काफी प्रतिस्पर्धी है। हर खंड में बड़ी संख्या में कंपनियां हैं। इससे दुनिया में सबसे कम कीमतें मिलती हैं। सामान्यत: जहां प्रतिस्पर्धा हो, वहां कीमत नियंत्रण की जरूरत नहीं होती। स्वास्थ्य उपचार और दवाओं में मरीजों तथा फार्मेसियों, अस्पतालों व डॉक्टरों के बीच सौदेबाजी की असमानता है।





