हैदराबाद। प्राइवेट अस्पताल और डॉक्टर पर एक करोड़ का जुर्माना लगा है। यह जुर्माना जिला उपभोक्ता आयोग-1 ने लगाया है। सिटीजन्स स्पेशलिटी हॉस्पिटल और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अपर्णा पर यह जुर्माना लगा है। यह मामला एक युवा छात्र की मौत से जुड़ा है। उसे इमरजेंसी इलाज के बजाय औपचारिकताओं के कारण देरी हुई। इस वजह से उसे अपनी जान गंवानी पड़ी।

आयोग ने मृतक के परिजनों को मुआवजे के रूप में 1 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया। साथ ही कानूनी खर्च के तौर पर अतिरिक्त 50,000 भुगतान करने को कहा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान करें। ऐसा न करने पर देय राशि पर 9% ब्याज भी देना होगा।

यह है मामला

उत्तर प्रदेश का सूर्य प्रताप हैदराबाद विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहा था। 17 अगस्त 2020 को वे हॉस्टल के बरामदे में बेहोश पाए गए। उनके साथी छात्र उन्हें सिटीजन्स स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स लेकर पहुंचे।

डॉक्टरों ने जांच में पाया कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया है। स्ट्रोक आने के शुरुआती 24 घंटों के महत्वपूर्ण समय में ‘मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी’ सर्जरी की जानी जरूरी थी। हॉस्पिटल के प्रबंधन ने सूर्य प्रताप के परिजनों की गैर-मौजूदगी का हवाला दिदया। इसके चलते सर्जरी में काफी देरी की। कोविड-नेगेटिव रिपोर्ट आने तक इलाज को नहीं रोका जाना चाहिए था। इसके बावजूद सूर्य प्रताप को एक आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया गया। इससे बेहद कीमती समय बर्बाद हुआ। इसके बाद, उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।

उसे गंभीर हालत में कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। वहां भर्ती होने के कुछ ही समय बाद उन्हें ‘ब्रेन-डेड’ घोषित कर दिया। 21 अगस्त को उनका निधन हो गया।

जांच रिपोर्टों और सबूतों को देखने के बाद उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाया। कहा कि सिटीजन्स हॉस्पिटल और न्यूरोलॉजिस्ट घोर चिकित्सा लापरवाही के दोषी हैं।