उज्जैन (मध्य प्रदेश)। आयुर्वेदिक दवा लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा LEVERA-500 बनाने का मामला सामने आया है। करीब 4.80 लाख टैबलेट तैयार कर बसों से हरिद्वार भेजने की जानकारी सामने आई। दवा की पैकिंग के लिए प्रिंटेड मैटेरियल भी उपलब्ध कराया जाता था। भुगतान नकद और ऑनलाइन माध्यम से होने की बात कही गई है। इससे जांच एजेंसियां निर्माण, सप्लाई और भुगतान की पूरी कड़ी जोडऩे में जुटी हैं।
यह है मामला
नकली और अवैध दवाओं के कारोबार के खिलाफ यूपी एफएसडीए की टीम ने उज्जैन में कार्रवाई की। यहां आयुर्वेदिक दवा लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा LEVERA-500 बनाने का मामला सामने आया है। करीब 4.80 लाख टैबलेट तैयार कर बसों से हरिद्वार भेजने की जानकारी सामने आई। दवा की पैकिंग के लिए प्रिंटेड मैटेरियल भी उपलब्ध कराया जाता था। भुगतान नकद और ऑनलाइन माध्यम से होने की बात कही गई है।
टीम ने उज्जैन के आगर रोड स्थित मेसर्स रुद्राया फार्मा पर छापा मारा। मौके पर फर्म संचालक प्रेम मलिक और उसका बेटा राहुल मलिक उर्फ रितिक मिला। पता चला कि फर्म के पास आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण का लाइसेंस था। प्रेम मलिक ने एजाज अहमद के साथ 8 से 10 साल से जुड़े होने की बात कही।
लखनऊ में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद तैयार दवाएं, पैकिंग मैटेरियल और डाई-पंच नष्ट कर दिए गए। पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीन को देवास में छिपाने की बात भी सामने आई है। वहीं फैक्ट्री की छत से 5,250 बिना लेबल वाली संदिग्ध ग्लास वायल मिलीं। इन्हें सात कार्टन में सील कर दिया गया। नमूने जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं।










