मुजफ्फरपुर। एंटीबायोटिक दवाएं बच्चों पर बेअसर साबित हो रहीं हैं। यह खुलासा एसकेएमसीएच में किए गए नए शोध में हुआ है। रिसर्च के मुताबिक अस्पतालों में आ रहे कई बच्चों में सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर साबित हो रही हैंं। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों में एंटीबायोटिक रेसिस्ट की संख्या अधिक है। इस कारण सामान्य बीमारियों के बच्चों को शक्तिशाली और महंगी एंटीबायोटिक दवाएं लिखनी पड़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक समय ऐसा आएगा जब एंटीबायोटिक दवाएं बीमारी दूर करने में कारगर नहीं होंगी।

बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेना खतरनाक

एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के रेसिस्ट होने की संख्या अधिक है। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों के झोलाछाप डॉक्टर सामान्य सर्दी-बुखार में भी एंटीबायोटिक दवाएं दे रहे हैं। कुछ लोग कैमिस्ट से पूछकर बच्चों को एंटीबायोटिक दे रहे हैं। कई बार दो-तीन दवा खाने के बाद ही दवा छोड़ देते हैं। इस कारण एंटीबायोटिक दवाएं रेसिस्ट कर जाता है। इससे बैक्टीरिया को मारने की क्षमता कम हो जाती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डॉक्टरों के लिए दिशा निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सामान्य रोग के लिए डॉक्टरों को सबसे पहुंच श्रेणी की दवा लिखनी चाहिए। इसके बाद उच्च क्षमता वाले एंटीबायोटिक्स दवाएं और अंत में रिजर्व श्रेणी की दवाएं लिखनी चाहिए।