नई दिल्ली। नकली कैंसर दवा बिक्री का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जीवनरक्षक इंजेक्शन की बिक्री को लेकर दायर जनहित याचिका डाली गई है। इसमें नकली दवाओं की बिक्री रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई।
याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया कि बेंगलुरु के अस्पतालों में नकली कैंसर की दवाएं सप्लाई की गईं। वहीं राजस्थान में नकली इंजेक्शन पहुंचाए जाने के मामले सामने आए हैं। नकली जीवनरक्षक दवाओं से लोगों की जान को गंभीर खतरा है।
सुनवाई के दौरान कानून में कथित खामी का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि इस संबंध में कानून मौजूद है। इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
वकील उपाध्याय ने कहा कि आतंकवादी एक साल में अधिकतम 1,000 लोगों की जान लेते हैं। जबकि नकली दवाओं के कारण लाखों लोगों की मौत होती है। इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए इसे संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान नकली कफ सिरप से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। जब नकली कफ सिरप का मामला सामने आया था, तब सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त आदेश पारित किए थे। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नकली दवा किसी व्यक्ति को देना अपराध है।
नकली दवाओं के कारण लोगों की मौत तक हो सकती है। ऐसे मामलों से सख्ती से निपटने की जरूरत है। अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपने सुझाव संबंधित अधिकारियों को भेजें। उन्हें उन पर कार्रवाई करने दें। मामले को अदालत में लंबित रखने की तुलना में यह तरीका ज्यादा प्रभावी हो सकता है।










