मुंबई। Eli Lilly फार्मा ने भारत में अपना ओबेसिटी अवेयरनेस कैंपेन रोक दिया है। ड्रग रेगुलेटर की चेतावनी पर कंपनी ने यह कदम उठाया है। रेगुलेटर का मानना है कि यह कैंपेन प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के अप्रत्यक्ष प्रचार से जुड़े नियमों का उल्लंघन कर सकता है।

US फार्मा के ‘We Know Now’ नाम के कैंपेन पर रोक लग गई है। कंपनी ने कहा है कि वह ‘रेगुलेटरी सावधानी’ बरत रही है।  भारत के सख्त प्रचार नियमों को लेकर स्पष्टता चाहती है। ये नियम अमेरिका से काफी अलग हैं। प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर एडवरटाइजिंग की इजाजत है।

भारत में पब्लिक हेल्थ इनिशिएटिव्स को बढ़ावा देने के सुझावों के बावजूद रोक के संकेत मिल रहे हैं। यह स्थिति पब्लिक हेल्थ मैसेज को पहुंचाने में रुकावट पैदा कर सकती है। USFDA प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर एडवरटाइजिंग की इजाजत देता है। भारत में Drugs and Magic Remedies जैसे कानून इन प्रथाओं को सख्ती से प्रतिबंधित करते हैं।

भारत में ओबेसिटी और डायबिटीज के इलाज का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2030 तक यह मार्केट ₹80 अरब तक पहुंच सकता है। Eli Lilly की Mounjaro भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा बन गई थी। इसे प्रतिद्वंद्वी Ozempic और Wegovy से कड़ी टक्कर मिल रही है।

मार्च तक 13 निर्माताओं के जेनेरिक सेमाग्लूटाइड उत्पाद मार्केट में आ गए थे। रेगुलेटर की यह चेतावनी Eli Lilly की भारतीय मार्केट स्ट्रेटेजी के लिए एक गंभीर झटका है। देश के कानून प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के पब्लिक एडवरटाइजिंग पर सख्ती से रोक लगाते हैं। भले ही वे ब्रांड अवेयरनेस बढ़ाने के लिए अप्रत्यक्ष प्रचार ही क्यों न हों। एनालिस्ट्स को ग्लोबल ओबेसिटी ड्रग मार्केट में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है।

Eli Lilly का मौजूदा P/E रेशियो लगभग 34.1x है। जो भविष्य की कमाई में निवेशक के भरोसे को दर्शाता है। यह मार्केट के औसत P/E से कम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। कंपनी के पास फिलहाल एक कंसेंसस ‘मॉडरेट बाय’ रेटिंग है। औसत टारगेट प्राइस करीब $1,218.33 है। Eli Lilly को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।