नई दिल्ली। भारतीय दवा कंपनियों के लिए यूरोप ने अपने दरवाजे खोल दिए हैं। अमेरिका के साथ टैरिफ तनाव के बीच यह सुखद खबर है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने यह जानकारी दी। कई भारतीय कंपनियों को ईयू में दवाओं के कच्चे पदार्थ यानी एपीआई के निर्यात के लिए लिखित मंजूरी दे दी है। ये कंपनियां अब यूरोप में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में एपीआई का निर्यात कर सकेंगी।
इन शर्तों पर मिली मंजूरी
सीडीएससीओ ने स्पष्ट किया है कि सभी कंपनियों को लगातार गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा। यदि निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता मानकों से कम पाई जाती है तो इसकी जानकारी सात दिनों के भीतर देनी होगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में यह मंजूरी तत्काल निलंबित या रद्द की जा सकती है।
दवाओं पर लगने वाले कर समाप्त होने से भारतीय जेनेरिक दवाएं यूरोप में और अधिक सस्ती बनेंगी। साथ ही, प्रशासनिक लागत कम होगी। नियमों के सरल होने से दवाओं को यूरोप में मंजूरी मिलने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में तेज हो जाएगी। एपीआई निर्यात की मंजूरी पाने वाली कंपनियों में ऑनर लैब लिमिटेड (तेलंगाना), रवि बायोलाइफ प्राइवेट लिमिटेड और यूनीमैक्स केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड (महाराष्ट्र) शामिल हैं।










