जबलपुर (मध्यप्रदेश)। रजिस्ट्रेशन बगैर चल रहे अस्पताल में एक्सपायरी दवाएं मिली हैं। बेलखाड़ू के पास अश्वनी अस्पताल में निरीक्षण किया गया। इस दौरान बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं मिली। ड्रग इंस्पेक्टर ने सील अस्पताल खुलवाकर जांच की। जांच में 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिलीं। इनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थीं। टीम ने करीब 12 हजार रुपए की दवाएं जब्त की हैं।
प्रारंभिक जांच में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। संचालिका सरिता साहू के पास एलोपैथिक चिकित्सा की मान्य डिग्री नहीं थी। वह बंगाल से प्राप्त डिप्लोमा पर अस्पताल चला रही थीं। मरीजों का एलोपैथिक दवाओं से इलाज कर रही थीं।
तीन दिन पहले 19 वर्षीय शेखर चौधरी की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल सील कर दिया था। अब जांच के दौरान यहां एक्सपायर्ड दवाएं भी मिलीं। पुलिस युवक की मौत के मामले की जांच में जुटी है।
इलाज के बाद बिगड़ी तबीयत, फिर मौत
बेलखाड़ू निवासी शेखर चौधरी को तेज पेट दर्द हुआ था। परिजन उसे खैरी गांव स्थित अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां इलाज के बाद वे उसे घर ले आए। कुछ देर बाद शेखर के हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी। परिजन उसे दोबारा अस्पताल ले गए। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
समीर चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की। सामने आया कि शेखर के हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए थे। अगले दिन उसे फिर इंजेक्शन दिया गया। साथ ही ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई। ड्रिप चढऩे के करीब आधे घंटे बाद शेखर की मौत हो गई। घटनास्थल से मिली ग्लूकोज की बोतल एक्सपायरी डेट की मिली। पुलिस ने बोतल, ड्रिप, निडिल, इंजेक्शन और दवाइयों के रैपर जब्त किए थे।
टीम ने अस्पताल में दवाओं की जांच की। यहां 23 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं मिलीं। इनमें एक्सपायरी दवाएं भी शामिल थी। अस्पताल के पास आवश्यक रजिस्ट्रेशन नहीं था। संचालिका के पास इलाज करने की मान्य डिग्री भी नहीं थी। इसके बावजूद यहां मरीजों के इलाज की बात सामने आई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।










