कानपुर (उप्र)। फर्जी बी.फार्मा प्रमाणपत्र गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। उम्मीदवारों के परीक्षा में शामिल हुए बिना ही फर्जी बी.फार्मा डिग्री तैयार करने का आरोप है। किदवई नगर पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाया। परिणामस्वरूप दो प्रमुख सरगनाओं को गिरफ्तार किया गया है। कई राज्यों में हजारों लाभार्थियों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।
हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि केवल 12वीं कक्षा उत्तीर्ण है। वह खुद को डॉक्टरेट धारक बताता था। उन्नाव निवासी अर्जुन यादव को गिरफ्तार किया गया। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने इस गिरोह को अत्यंत संगठित होम डिलीवरी नेटवर्क बताया। यह वर्षों से हाई स्कूल प्रमाणपत्रों से लेकर बी.फार्मा, पीएचडी तक के जाली दस्तावेज उपलब्ध करा रहा था। आरोप है कि गिरोह छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय सहित प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की मुहरों की जालसाजी करता था।
जांचकर्ताओं ने लगभग 80 फर्जी प्रवास प्रमाण पत्र, कई जाली मार्कशीट और डिग्रियां, नकली विश्वविद्यालय की मुहर बरामद की। इनमें हजारों लेन-देन और लाभार्थियों के डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद थे। पुलिस वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। इसमें मनीष के खाते में ट्रांसफर किए गए 16.44 लाख और अर्जुन यादव से जुड़े लगभग ₹20 लाख शामिल हैं। आगे और गिरफ्तारियां होने की आशंका है। एसआईटी अब संजय पंजवानी की भूमिका की जांच कर रही है।










