बेंगलुरु (कर्नाटक)। नकली दवा बनाने वाला गिरोह पकड़ा गया है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जिले के बिदादी में दवाओं की री-पैकिंग और री-लेबलिंग करने के ठिकाने पर रेड की। जांच में पता चला कि ये कारोबार बिना लाइसेंस के किया जा रहा था। मौके से 5.05 करोड़ की नकली दवाएं, मशीनरी और प्रिंटिंग का सामान जब्त किया गया। 16 फर्मों के ड्रग लाइसेंस कैंसिल किए गए हैं। वहीं, फाइजर डिपो समेत 8 फर्मों के लाइसेंस सस्पेंड किए हैं।

फार्म हाउस में नकली दवा का रैकेट

ड्रग एनफोर्समेंट विंग ने 18 अगस्त को जांच अभियान चलाया था। इसके तहत बिदादी के कुरुबाराकेरानाहल्ली में स्थित नंबर-34 फार्महाउस पर रेड की। वहां बिना लाइसेंस के फार्मास्यूटिकल री-पैकिंग और री-लेबलिंग का रैकेट पकड़ा गया। 16 फर्मों के लाइसेंस रद्द करने और 8 फर्मों के लाइसेंस सस्पेंड करने की जानकारी दी गई है। वहीं, नेलमंगला तालुक के केम्पलिंगनहल्ली में फाइजर सी एंड एफ डिपो का लाइसेंस भी सस्पेंड किया है।

पता चला कि पड़ोसी राज्यों से सस्ती दवाएं यहां लाई जाती थीं। उनकी दोबारा पैकेजिंग की जाती थी। उन पर महंगी जीवन-रक्षक दवाओं के लेबल लगाए जाते थे। दवाओं पर ऐसे लेबल लगे थे, जो फाइजर ब्रांड के इंपोर्टेड प्रोडेक्ट जैसे दिखते थे। जब्त स्टॉक में CEFIAVIGENT 2.5 इंजेक्शन की 5,640 शीशियां शामिल हैं। इनकी कीमत लगभग 3.38 करोड़ रुपये है। HIZLAM इंजेक्टेबल्स की 1,531 शीशियां पकड़ी गईं। इनकी कीमत लगभग 52.24 लाख रुपये है। छापेमारी में 35 लाख रुपये की कीमत की एक्सपायर दवा भी पकड़ी गई। मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।