मुंबई। फार्मा कंपनी माइलन लैबोरेटरीज के खिलाफ एफआईआर कैंसिल हो गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी किए। कोविड-19 महामारी के दौरान बीएमसी द्वारा रेमडेसिविर इंजेक्शन की खरीद हुई थी। इसमें कथित अनियमितताओं को लेकर फार्मा कंपनी माइलन लैब के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। कंपनी के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनने पर इसे रद्द कर दयिा गया।

न्यायमूर्ति अश्विन भोबे ने मायलन और कुछ अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा, कंपनी के खिलाफ किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं होता है। बीएमसी ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की खरीद के लिए टेंडर किए थे। इनमें अनियमितताओं के आरोपों के बाद एफआईआर दर्ज की गई। आरोप था कि नगर निगम अधिकारियों ने कंपनी के साथ मिलीभगत की थी। कंपनी ने 650 रुपये से लेकर 2,626 रुपये प्रति शीशी की दर से इंजेक्शन आपूर्ति की थी। इन कथित लेन-देन के कारण निगम को 5.96 करोड़ का नुकसान हुआ था ।

मायलान ने एफआईआर को रद्द करने की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। कहा कि इसी तरह के आरोपों की जांच पहले ही महाराष्ट्र लोकायुक्त द्वारा की जा चुकी है। अदालत को बताया कि लोकायुक्त ने विस्तृत जांच की थी। यह निष्कर्ष निकाला था कि रेमडेसिविर की खरीद में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ था। निविदा प्रक्रिया पारदर्शी पाई गई। कीमतों में वृद्धि का कारण बाजार में बढ़ती मांग थी। कंपनी ने तर्क दिया कि लोकायुक्त के निष्कर्षों के बावजूद कार्यवाही जारी रखना विधि का दुरुपयोग होगा। न्यायमूर्ति भोबे ने कंपनी के खिलाफ एफआईआर को रद्द कर दिया।