नई दिल्ली। विदेशी दवाएं आईएनडी की जांच के बाद ही बाजार में आएंगी। यह अहम फैसला केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने लिया है। अब ऐसी दवाएं सीधे भारत में आयात और मार्केटिंग नहीं की जा सकेगी। जिन्हें अभी तक किसी भी देश में मंजूरी नहीं मिली है। इससे पहले संबंधित दवा को इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग (आईएनडी) डिविजन से मंजूरी लेनी होगी।

ऐसी दवाएं जिनके फेज-3 के वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं। या भारतीय नागरिकों पर क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो चुके हैं। उनके आवेदनों की समीक्षा अब सीडीएससीओ का आईएनडी डिविजन करेगा। संबंधित आवेदकों को गैर-क्लीनिकल और क्लीनिकल डेटा भी प्रस्तुत करना होगा। किसी अन्य देश में दवा की नियामकीय स्थिति को भी समीक्षा के दौरान ध्यान में रखा जाएगा। इस फैसले से सैकड़ों दवा उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। विदेशों से वही दवाएं भारत में आएंगी, जो मानकों पर खरी उतरती हों। इससे पहले फेज-3 ट्रायल के दौरान ही दवाओं का आयात शुरू हो जाता थ। इसका असर भारतीय फार्मा उद्योग पर पड़ता था।

सीडीएससीओ को इस संबंध में शिकायतें मिल रही थीं। बताया गया कि देश में क्लीनिकल ट्रायल के आधार पर दवाओं की मार्केटिंग की अनुमति मांगी जा रही है। ये दवाएं वैश्विक स्तर पर अभी अप्रमाणित या समीक्षा के अधीन हैं। इस पर सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने विचार-विमर्श किया। ये माना कि विदेशी नियामकीय संस्थाओं के पास समीक्षा के अधीन दवाओं के डेटा का मूल्यांकन जरूरी है।