मुजफ्फरपुर। दवा बनाने में अब एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने नये सिलेबस में एआई को शामिल किया है। नये सत्र से यह सिलेबस सभी फार्मेसी कॉलेजों में शुरू हो जाएगी। बिहार में दो दर्जन से अधिक कॉलेजों में फार्मेसी की पढ़ाई होती है। हर साल हजारों छात्र इस कोर्स में दाखिला लेते हैं। एमआईटी में भी फार्मेसी की पढ़ाई करायी जाती है।

एमआईटी के प्राचार्य प्रो. मिथिलेश कुमार झा ने कहा कि फार्मेसी में एआई के इस्तेमाल से छात्र दवा बनाना सीख सकेंगे। एआई का उपयोग सीखने से नौकरियों में भी फार्मेसी के छात्रों को फायदा होगा। फार्मेसी के नये सिलेबस में नवाचार और अनुसंधान पर विशेष जोर दिया गया है। फार्मेसी काउंसिल का कहना है कि दवा के निर्माण में नवाचार और अनुसंधान करना जानना होगा। छात्र तभी बाजार के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। नवाचार और अनुसंधान से इलाज में काम आने वाली बेहतर दवाएं बन सकेंगी। स्नातक से ही छात्रों का फोकस अनुसंधान पर हो तो दवा निर्माण में यह बेहतर परिणाम ला सकेगा। नये सिलेबस में लाइफ लांग लर्निंग को भी जोड़ा गया है। इसके लिए फार्मेसी की पढ़ाई के बाद भी छात्रों का उन्मुखीकरण किया जाता रहेगा।

फार्मेसी के छात्रों को दवा निर्माण में डिजिटल तकनीक भी सिखाई जाएगी। फार्मेसी के सिलेबस में स्टार्टअप को भी जोड़ा गया है। इससे स्नातक करने के बाद छात्र अपना रोजगार भी शुरू कर सकेंगे। सिलेसब में फार्मेसी के छात्रों को लैब वर्क विशेष तौर पर करने की बात कही गई है। कोर्स के दौरान छात्रों को इंटर्नशिप भी करायी जायेगी। फार्मेसी के छात्रों को रोगी सुरक्षा कानून की भी पढ़ाई करायी जायेगी।