आपदा में अवसर: कोरोना काल में मरीजों की जान से खिलवाड़, दवा के नाम पर बेच दी खड़िया, जांच में फेल पाए गए सेंपल

मेरठ। देश भर में एक तरफ कोरोना महामारी की वजह से हाहाकार मचा हुआ था तो वहीं दूसरी तरफ आपदा में अवसर तलाश रहे लोग इसका पूरा फायदा उठा रहे थे। कोरोना काल के दौरान लोगों ने मरीजों की जिंदगी से खूब खिलवाड़ किया। बता दें कि कोरोना काल में मरीज अपनी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। लेकिन पैसों के लालच में कुछ लोग उनकी जिदंगियों से खिलवाड़ करने में कसर नहीं छोड़ रहे थे।

कोरोना काल में दवा के बजाय खड़िया बेच दी गई। कोरोना महामारी के दौर में इलाज के नाम पर नकली दवाइयां बेची गईं। कुछ दिन पहले मेरठ जनपद से पुलिस ने दवाई से सैंपल लिए थे। जिसके बाद अब ड्रग्स विभाग द्वारा लखनऊ भेजे गए चार सैंपलों की रिपोर्ट आ गई है। जो सभी मानकों पर फेल पाए गए है। मिली जानकारी के अनुसार आरोपियों ने कोरोना काल में दवा के बजाय खड़िया बेच दी गई। जिसके बाद अब पुलिस ने कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि जून 2021 में महाराष्ट्र एफडीए को फेविपिराविर के नाम की नकली दवाएं मिली थीं। इस दवा में फेविपिराविर का नाम इस्तेमाल किया जा रहा था, अंदर खड़िया थी। इसका उत्पादन मेरठ में धीरखेड़ा स्थित फैक्टरी में होना बताया गया था। जिसके चलते मुंबई पुलिस ने खरखौदा पुलिस के साथ मिलकर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में कार्रवाई की और फैक्टरी पर सील लगा दी थी।

हालांकि छापेमारी के दौरान टीम को फैक्ट्री में ऐसी कोई दवा नहीं मिली थी। वहीं एक निजी अस्पताल और छीपी टैंक के एक मेडिकल स्टोर में भी यह दवा मिली थी, उनके नौ सैंपल जांच के लिए लखनऊ लैब भेजे थे, जिनकी रिपोर्ट अब आई है। इसमें चार सैंपल फेल निकले हैं। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं इस पूरे मामले पर ड्रग इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि इस संबंध में मुंबई पुलिस से बात की जाएगी। उन्होंने किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था, यह जानने के बाद उचित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।