मार्किट में अमानक एंटीबायोटिक, प्रदेश में हड़कंप

भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वालों के लिए ऐसी खबर है जिसके बारे में जान वो परेशान हो जाएंगे। अब कौन चाहेगा कि अस्पताल से वो ऐसी दवा लेकर आए जिससे उसकी सेहत ठीक होने की जगह खराब हो जाए।

सूबे के सरकारी अस्पतालों में बंटने वाले तीन अहम एंटीबायोटिक दवाएं अमानक मिली हैं। इनमें एक दवा की एक्सपायरी फरवरी 2018 है, जबकि जांच रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2017 को जारी की गई है। ऐसे में साफ है कि ज्यादातर अमानक दवा मरीज खा चुके होंगे।

प्रदेश की पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन ने अब इन दवाओं का उपयोग रोकने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन व सभी जिलों के मुख्य चिकत्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों व सिविल सर्जन को पत्र लिखा है। अमानक मिलीं सभी दवाएं माडर्न लेबोरेट्रीज द्वारा बनाई गई हैं। बताया गया कि ओफ्लाक्सासिन (200 एमजी) और टिंडाजोल (600 , एमजी)- 28 अक्टूबर को जांच रिपोर्ट में ये दवा अमानक मिली। इसका बैच नंबर ओईटी 1701, निर्माण तिथि मार्च 2017 और एक्सपायरी फरवरी 2019 है।

लोग सवाल उठा रहे है कि जिन लोगों ने ये दवाएं खा ली, उनकी सेहत के साथ हुए इस खिलवाड़ के लिए क्या कोई जिम्मेदारी लेगा और कब तक आम लोगों की सेहत के साथ हो रहे इस खेल को चलाया जाएगा।