हैदराबाद। सन फार्मा के असम प्लांट में गंभीर खामियां मिली हैं। इसके आई ड्रॉप्स का उत्पादन बंद करने का आदेश जारी हुआ है। यह आदेश भारतीय दवा नियामकों ने सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज को दिया है। कंपनी के असम स्थित संयंत्र में आंखों की दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण रोकने का आदेश दिया है। कंपनी की गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में गंभीर खामियां मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
यह है मामला
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने संयंत्र का निरीक्षण किया था। जांच में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं में कई गंभीर कमियां मिली थीं। इस मामले में सन फार्मा ने आंखों की दवाओं के करीब 11 ब्रांड बाजार से वापस मंगाए थे। इन दवाओं के कुल 332 बैच रिकॉल किए गए हैं। यह साफ नहीं है कि सभी बैच में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी थी।
वापस मंगाई दवाओं में लोटेप्रैड 1त्न (5 एमएल), नेपालैक्ट ओडी, नेपालैक्ट-जेड, ब्रिनजोटिम और डेपोप्रैड जैसे आई ड्रॉप्स शामिल हैं। इनका इस्तेमाल आंखों की सूजन, संक्रमण और अन्य रोगों में किया जाता है। कुछ मरीजों में आई ड्रॉप से संक्रमण के प्रतिकूल मामले सामने आए थे। सीलबंद बोतलों की जांच में वे दूषित पाई गईं।
दूषित आई ड्रॉप्स को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने प्रेडमीट आई ड्रॉप्स के कुछ बैचों को लेकर सुरक्षा एडवाइजरी जारी की थी। कुछ मरीजों में संक्रमण के मामले सामने आए थे। सीलबंद बोतलों की जांच में भी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी। इसके बाद कंपनी ने संबंधित बैच वापस मंगाए थे।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
एक अधिकारी के मुताबिक, सन फार्मा ने नियामकों को अनुपालन रिपोर्ट सौंप दी है। इसकी फिलहाल जांच की जा रही है। कंपनी ने प्लांट पर कार्रवाई और रिकॉल को लेकर सवालों का जवाब नहीं दिया। बीते साल अमेरिकी नियामक को गुजरात स्थित सन फार्मा के हलोल संयंत्र पर कमियां मिली थी। इसके चलते दवाओं की शिपमेंट पर रोक लगाई थी।





