एर्नाकुलम (केरल)। फार्मेसी MRP से कम कीमत पर दवाएं बेच सकती हैं। केरल हाई कोर्ट ने इस बारे में साफ़ संदेश दे दिया है। ग्राहकों की सुरक्षा और बिज़नेस की आज़ादी के बीच संतुलन बनाया है। राज्य में फ़ार्मेसी पारदर्शी तरीके से सही डिस्काउंट दे सकती हैंं। हालांकि, कोर्ट ने ड्रग्स कंट्रोलर के अधिकार को बरकरार रखा है।
औषधि निरीक्षक गुमराह डिस्काउंट विज्ञापनों पर रोक लगा सकते हैं। कोर्ट ने दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाया। ड्रग्स कंट्रोलर द्वारा जारी सर्कुलर को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया। उसे लागू करने की मांग करने वाली तीसरी याचिका को मंज़ूरी दे दी।
यह विवाद केरल के ड्रग्स कंट्रोलर ऑफिस द्वारा जारी सर्कुलर से शुरू हुआ। इसमें नए ड्रग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों से हलफनामा जमा करने को कहा गया था। इसमें उन्हें यह वचन देना था कि वे गुमराह करने वाले डिस्काउंट बोर्ड नहीं लगाएंगे। न ही दवाओं की कीमत के बारे में अस्पष्ट दावे करेंगे।
कई फ़ार्मेसी भारी छूट का वादा करने वाले बोर्ड लगा रहे थे। यह नहीं बता रहे थे कि कौन सी दवाएं इसमें शामिल हैं। या असल में कितनी छूट मिलेगी। आलोचकों का आरोप था कि ऐसे बोर्ड ग्राहकों को लुभाते थे। उन्हें बहुत कम छूट मिलती थी। भारी छूट वाली दवाओं की क्वालिटी को लेकर भी चिंताएं थीं। ड्रग्स कंट्रोलर ने प्रस्तावित अंडरटेकिंग में यह बदलाव किया।
यह फ़ैसला केरल की फ़ार्मेसियों के लिए स्पष्टता लाता है। सही तरीके से डिस्काउंट देने वाली फ़ार्मेसियां काम जारी रख सकती हैं। साफ़-सुथरे ऑफऱ का विज्ञापन कर सकती हैं।










