अमरोहा (उप्र)। प्राइवेट ब्लड बैंकों की अब खैर नहीं। ब्लड बैंकों को खून की एक-एक बूंद का हिसाब देना होगा। प्रभारी सीएमओ ने ब्लड की कालाबाजारी रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। निजी ब्लड बैंक संचालकों को रक्तदान शिविर लगाने से पूर्व सीएमओ की अनुमति लेनी होगी। उसके बाद ही शिविर लगेगा। इसमें संचालकों को खून की एक-एक बूंद का 15 दिन में हिसाब देना होगा। शिविर में कितने यूनिट रक्तदान हुआ। कौन-कौन से मरीजों को रक्त दिया गया हैं।
लापरवाही पर संबंधित ब्लड बैंक का पंजीकरण निरस्त किया जाएगा। इसके साथ ही संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। दरअसल, गंभीर मरीजों को खून के लिए कहीं भटकना न पड़े। इसके लिए जिला अस्पताल में ब्लड बैंक संचालित हैं। इसमें जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को जरूरत पडऩे पर मुफ्त रक्त चढ़ाया जाता है।
इसके बदले में तीमारदार को अपना रक्त देना होता है। रक्त एकत्र करने के लिए समय-समय पर शिविर लगाए जाते हैं। इसमें रक्तदाता दूसरों की जान बचाने के लिए अपना रक्तदान करते हैं। इसमें खास बात यह है कि जनपद में छह निजी ब्लड बैंक भी संचालित हैं। इनमें बिना किसी सीएमओ की अनुमति के स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाया जा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में लोग रक्तदान कर रहे हैं। उसका अभी तक कोई हिसाब किताब नहीं था। इसके चलते निजी ब्लड बैंक संचालक अपनी मनमानी करते हैं। मरीजों को महंगे दामों में खून बेचते हैं। लिहाजा प्रभारी सीएमओ डा. योगेंद्र सिंह ने खून की कालाबाजारी रोकने के लिए अहम निर्णय लिया है। अब निजी ब्लड बैंक संचालक को शिविर लगाने से पूर्व सीएमओ से अनुमति लेनी होगी।










