नई दिल्ली। एस्ट्राजेनेका फार्मा से 151 करोड़ की वसूली पर हाई कोर्ट ने रोक लगाई है। दिल्ली उच्च न्यायालय से राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) को अधिक शुल्क की वसूली के लिए दंडात्मक कदम उठाने से रोका है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि 11 जनवरी, 2027 को अगली सुनवाई तक नियामक कोई प्रवर्तन कार्रवाई न करे। यह अंतरिम राहत मूल्य निर्धारण उल्लंघनों से संबंधित मांग को संबोधित करती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह कानूनी चुनौती एनपीपीए द्वारा जारी एक नोटिस से संबंधित है। इसमें सिम्बिकॉर्ट टर्बुहेलर 160/4.5 (इनहेलर) पर अधिक कीमत वसूलने का आरोप लगाया गया था। प्राधिकरण ने दावा किया कि मई 2016 से नवंबर 2025 की अवधि के दौरान उल्लंघन हुए। एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दायित्व को चुनौती दी।
वित्तीय प्रभाव और नियामक स्थिति

यह स्थगन कंपनी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ में बताई गई वित्तीय देनदारी के संबंध में तत्काल राहत प्रदान करता है। कुल राशि में कथित रूप से अधिक वसूला गया मूल्य और 30 अक्टूबर, 2026 तक अर्जित ब्याज शामिल है। घोषित की गई 151,19,66,035 की राशि संचयी वित्तीय देनदारी को दर्शाती है।
इसमें अधिक वसूल की गई मूल राशि और ब्याज दोनों शामिल हैं। दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाकर कोर्ट ने तत्काल नकदी बहिर्वाह की आवश्यकता को स्थगित कर दिया है। इससे कंपनी को संपत्ति कुर्की या अन्य प्रवर्तन उपायों का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही बिना डीपीसीओ, 2013 की व्याख्या की वैधता को चुनौती देने की अनुमति मिल गई है।





