नई दिल्ली। एंटी-एजिंग दवा के निर्माण में कामयाबी मिली है। इसके हैरतअंगेज परिणामों से वैज्ञानिक भी हैरान हैं। इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस फेफड़ों की लाइलाज बिमारी है। इस बीमारी में लंग्स के टिशूज बेहद सख्त हो जाते हैं। इससे सांस लेने में तकलीफ होती है।
वैज्ञानिकों ने पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से बनाया गया है. अभी यह दवा बाजार में नहीं है और इसका ट्रायल चल रहा है. लेकिन वैज्ञानिकों ने इसके साथ एक और खोज कर ली है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस दवा में एंटी-एजिंग गुण भी है। यानी यह जवानी की रफ्तार को रोकने में सक्षम है। इस दवा को खाने से शरीर में बायलॉजिकल उम्र की रफ्तार कम हो सकती है। यह दवा इंसिलिको मेडिसीन कंपनी ने बनाई है।
दो ट्रायल में शानदार परिणाम
नेचर जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ट्रायल का अभी दो चरण पूरा हुआ है। इसमें सकारात्मक परिणाम आया है। अभी दो ट्रायल और होने हैं। इस अध्ययन में एजिंग क्लॉक के 6 पैमाने का अध्ययन किया गया। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और चीन के पीकिंग यूनिवर्सिटी ने इसके मानदंडों को तय किया है। ये परिणाम अभी शुरुआती हैं। लोगों के बड़े समूह पर इस दवा के दीर्घकालिक हेल्थ पर असर का आकलन करना बाकी है। यह अध्ययन अभी सिर्फ 42 लोगों पर किया गया।
दवाओं के दोहरे इस्तेमाल पर रिसर्च
उम्र को धीमा करने वाली दवा पहले से इस्तेमाल हो रहे हैं। नई एंटी-एंजिंग दवाओं को विकसित करने के प्रयास अक्सर असफल रहे हैं। जो दवाइयां पहले से इस्तेमाल हो रही है उनका भी दीर्घकालीन रिसर्च नहीं है। हालांकि जब से मोटापे को कम करने वाली दवा आई है। इस क्षेत्र में रिसर्च बढ़ गई है। अब दवाओं के दोहरे फायदों पर ज्यादा रिसर्च होने लगी है। बड़ी-बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से अपनी रुचि दिखा रही हैं।










