कोटा (राजस्थान)| थैलीसीमिया से जूझ रहे दो बच्चे HIV संक्रमित हो गए हैं। इनमें एक 8 साल की बच्ची, दूसरा 13 साल का बच्चा है। आरोप है कि संक्रमित खून चढ़ाने से वे HIV संक्रमित हो गए हैं। हालांकि संक्रमित इंजेक्शन या ड्रिप से भी संक्रमण होने की आशंका है। सरकारी जेकेलोन अस्पताल के ब्लड बैंक से खून चढ़ाया गया था। ज्यादा संभावना ब्लड की है। थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाया जाता है।
दोनों बच्चों के माता-पिता की जांच करवाई तो रिपोर्ट निगेटिव थी। इस कारण ब्लड से ही दोनों बच्चों में संक्रमण की आशंका है। शिकायत के बाद से पूरे मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मचा है। तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। 13 साल का बच्चा मूल रूप से बूंदी जिला निवासी है। अभी उनके परिजन कोटा ही रह रहे हैं। 8 साल की बच्ची भी कोटा की रहने वाली है। बच्चे को नियमित रूप से यहीं के ब्लड बैंक से बल्ड चढ़ाया जा रहा है। करीब एक साल से उसका जयपुर के निजी मेडिकल कॉलेज से इलाज चल रहा है। एक साल से ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन बंद है। जयपुर के इसी अस्पताल में इंजेक्शन या ड्रिप चढ़ाने के कारण भी संक्रमित होने की आशंका है।
एचआईवी अन्य कारणों से भी संभव : एचओडी
ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. परमेंद्र पचौरी ने बताया कि थैलीसीमिया बच्चों को ब्लड बैंक में 100 प्रतिशत नेट टेस्टेड ब्लड दिया जा रहा है। इस टेस्ट के जरिए किसी भी खून में एचआईवी या अन्य संक्रमण अर्ली डिटेक्ट किए जा सकते हैं। यह अब तक उपलब्ध सबसे एडवांस टेस्ट टेक्नोलॉजी है। इसका विंडो पीरियड न्यूनतम है। एचआईवी संक्रमण सिर्फ ब्लड से ही नहीं, अन्य कारणों से भी होता है। जैसे कहीं इंजेक्शन या ड्रिप लगी हो या अन्य कोई कारण रहा हो।










