दवा घोटाले की जांच से बच रहे जिले

लखनऊ। सूबे में करीब 12 साल पहले हुए करोड़ों रुपए के दवा घोटाले में शामिल कई जिले जांच से बच रहे हैं। कई बार रिमाइंडर देने के बावजूद संबंधित वे दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। दस्तावेज की कमी के चलते एफआईआर दर्ज नहीं हो पा रही है, जिससे मामले की जांच अधर में लटकी है।

गौरतलब है कि चंदौली में हुए करोड़ों रुपए के इस दवा घोटाले की जांच में यूपीडीपीएल, स्वास्थ्य अधिकारियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की मिलीभगत उजागर हुई थी। इस घोटाले की जड़ें लखनऊ समेत 47 और जिलों में फैली हुई हैं। ईओडब्ल्यू का कहना है कि जिन जिलों से दस्तावेज मिल गए हैं, वहां जल्द ही एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। इसके अलावा चंदौली में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारियां भी जल्द होंगी। वहीं, जो अफसर या कर्मचारी दस्तावेज देने में आनाकानी कर रहे हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।

करीब 12 साल पुराने इस मामले में यूपी ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (यूपीडीपीएल) ने केंद्रीय औषधि भंडार को नकली दवाएं सप्लाई कर करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया। जांच में आरोप सही मिलने पर ईओडब्ल्यू ने यूपीडीपीएल के अफसरों, दो जिलों के सीएमओ समेत सात अफसरों और प्रिया फार्मास्युटिकल्स वाराणसी के मालिक राजेश चंद्र सिंह, मेसर्स दाऊ मेडिकल आगरा के मालिक सुरेश चौरसिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। बता दें कि ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के मुताबिक दवाओं की कमिशनखोरी के चलते ही यूपीडीपीएल बंद हो गई थी। ईओडब्ल्यू के डीजी आलोक प्रसाद के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में हुए इस घोटाले की तेजी से जांच की जा रही है। जांच के दौरान 2004-06 के बीच स्वास्थ्य विभाग में तैनात रहे केंद्रीय औषधि भंडार के अपर निदेशक, मंडलों के अपर निदेशक, जिलों के सीएमओ और सीएमएस और यूपीडीपीएल के प्रबंध तंत्र से जुड़े सभी अधिकारियों की भूमिका की गहनता से जांच की जाएगी। इसके बाद मुकदमे दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कानपुर के व्यापारी ने की थी शिकायत
2006 में कानपुर के पनकी की निर्मल इंड्रस्ट्रीज एंड कंपनी के मालिक प्रवीण सिंह ने ईओडब्ल्यू में शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि यूपीडीपीएल सरकार द्वारा पोषित दवा निर्माण इकाई थी। यह हर साल केंद्रीय औषधि भंडार को 25 करोड़ रुपये से ज्यादा की दवाएं बेचती थी। ये दवाएं स्वास्थ्य निदेशालय के जरिए जिलों में भेजी जाती थी। वर्ष 2004-05 और 2005-06 में यूपीडीपीएल के उप प्रबंधक विपणन डीएल बहुगुणा ने चंदौली के सीएमओ और अन्य चिकित्साधिकारियों से मिलीभगत कर शासनादेश के खिलाफ दवाओं के वितरण के लिए प्राइवेट डिस्ट्रीब्यूटर्स बना दिए। ईओडब्ल्यू की जांच में प्रवीण सिंह के लगाए आरोप सही पाए गए।

Related Posts

नशा मुक्ति केंद्रों में खेल, 4 रुपये की गोली 250 में बेची

अमृतसर (पंजाब)। नशा मुक्ति केंद्रों में दवाओं का खेल सामने आया है। 4 रुपये की गोली 250 तक में बेचने की जानकारी मिली है। सूचना पर आयकर विभाग ने अमृतसर…

दवा दुकानों पर गायब मिले फार्मासिस्ट, तीन स्टोरों को बंद कराया

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छत्तीसगढ़)। दवा दुकानों पर औषधि प्रशासन की टीम ने कार्रवाई की है। केल्हारी और मनेंद्रगढ़ क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन सामने आया। कई स्टोर पर पंजीकृत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

नशा मुक्ति केंद्रों में खेल, 4 रुपये की गोली 250 में बेची

  • By Desk
  • October 29, 2026
  • 4 views
नशा मुक्ति केंद्रों में खेल, 4 रुपये की गोली 250 में बेची

दवा दुकानों पर गायब मिले फार्मासिस्ट, तीन स्टोरों को बंद कराया

  • By Desk
  • October 29, 2026
  • 5 views
दवा दुकानों पर गायब मिले फार्मासिस्ट, तीन स्टोरों को बंद कराया

ताकतवर एंटीबायोटिक बेअसर, नई दवा के मेल से राहत

  • By Desk
  • October 29, 2026
  • 6 views
ताकतवर एंटीबायोटिक बेअसर, नई दवा के मेल से राहत

मेडिकल स्टोर पर छापेमारी, 26 एक्सपायर्ड दवाएं जब्त

  • By Desk
  • October 29, 2026
  • 4 views
मेडिकल स्टोर पर छापेमारी, 26 एक्सपायर्ड दवाएं जब्त

कैंसर की दवाएं हो गईं सस्ती, 93 फीसदी तक घटी कीमत

  • By Desk
  • October 29, 2026
  • 4 views
कैंसर की दवाएं हो गईं सस्ती, 93 फीसदी तक घटी कीमत

दवा की MRP और रिटेलर की खरीद कीमत में भारी अंतर : SC

  • By Desk
  • October 28, 2026
  • 16 views
दवा की MRP और रिटेलर की खरीद कीमत में भारी अंतर : SC