निर्माता अस्पतालों को दवाओं की सीधी आपूर्ति के TNPDA के विरोध से असहमत

तमिलनाडु फार्मास्युटिकल डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (TNPDA) द्वारा पारित प्रस्ताव पर दवा निर्माताओं ने प्रतिक्रिया दी है। देश भर के दवा निर्माताओं ने कहा है कि अस्पतालों में दवाओं की सीधी आपूर्ति उन मरीजों के लिए फायदेमंद है जो आवश्यक दवाएं सीधे अस्पतालों से लेते हैं। दवा निर्माताओं की राय है कि दवाओं का निर्माण उन रोगियों की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है जो दवाओं के लिए अस्पतालों में डॉक्टरों के पास जाते हैं, न कि उनके परिसर में वितरकों के पास। दूसरे, अस्पतालों के बाहर फार्मेसियों से मरीज़ जो दवायें खरीदते हैं, वे डॉक्टरों की सलाह पर होती हैं।

निर्माता कंपनियों का दावा है कि खुदरा दुकानों में पंजीकृत फार्मासिस्टों द्वारा दवाओं के वितरण के उल्लेख के अलावा अस्पतालों या डॉक्टरों के क्लीनिकों में दवाओं के विपणन के लिए कोई निर्धारित नियम नहीं हैं। आपको बता दें कि TNPDA  ने पिछले रविवार को एक प्रस्ताव पारित कर मांग की थी कि दवा निर्माता कंपनियों को कम दरों पर अस्पतालों को दवाओं की सीधी आपूर्ति बंद करनी चाहिए।

ये भी पढ़ें- NPPA ने 44 फॉर्मूलेशन का खुदरा मूल्य तय किया

तेलंगाना राज्य बोर्ड के अध्यक्ष जे राजामौली के अनुसार, यदि कंपनियां आपूर्ति की पारंपरिक प्रणाली के माध्यम से अपना कारोबार जारी रखती हैं, यानी विनिर्माण स्थल से सुपर-स्टॉकिस्ट-से-वितरक/थोक तक -रिटेल, व्यवसाय व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं होगा। स्टॉकिस्टों के माध्यम से की जाने वाली आपूर्ति की तुलना में संस्थागत आपूर्ति-दर बहुत कम है। जहां तक ​​अस्पताल की आपूर्ति का सवाल है, निर्माता अस्पतालों के लिए कीमतें कम कर सकते हैं, लेकिन अगर आपूर्ति वितरकों के माध्यम से की जाती है, तो कंपनियों को शून्य लाभ के साथ छोड़ दिया जाएगा क्योंकि उन्हें अस्पतालों और वितरकों को भी मार्जिन का भुगतान करना होगा।

गुवाहाटी में दवा निर्माण कंपनी सिग्नोवा हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और असम ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एडीएमए) के पदाधिकारी केआर विजय कुमार ने कहा कि विनिर्माण कंपनियों से अस्पतालों तक दवाओं की आपूर्ति अनिवार्य रूप से जारी रहनी चाहिए क्योंकि वितरण का चैनल पारदर्शी है और इससे मरीजों को लाभ होता है।

पंजाब में लघु फार्मा उद्योग निगम (एसपीआईसी) के महासचिव जगदीप सिंह ने कहा कि चूंकि दवा बाजार में बहुतायत की स्थिति है, इसलिए हर बड़ी फार्मा विशेष डोमेन चाहती है और हर कोई संस्थागत ग्राहकों के लिए प्रयास कर रहा है।

फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स (एफओपीई) के मध्य प्रदेश चैप्टर के उपाध्यक्ष अमित चावला ने टिप्पणी की है कि टीएनपीडीए द्वारा उठाए गए मुद्दे को एसोसिएशन स्तर पर हल किया जाना चाहिए।

इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (बीआईडीएमए) के बिहार राज्य बोर्ड के अध्यक्ष संजीव राय ने कहा है कि चूंकि अस्पतालों के पास थोक लाइसेंस नहीं है, इसलिए निर्माताओं द्वारा उन्हें आपूर्ति करना अवैध है।

 

Related Posts

सील अस्पताल के संचालकों पर एफआईआर दर्ज

एटा (यूपी)। सील अस्पताल के संचालकों पर एफआईआर दर्ज की गई है। कोतवाली नगर में पीपल अड्डे पर आरएन अस्पताल स्थापित है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे सील करने के बाद…

अवैध मेडिकल स्टोर पर छापेमारी, 43 प्रकार की दवाएं जब्त

मोतिहारी (यूपी)। अवैध मेडिकल स्टोर से 43 प्रकार की दवाएं जब्त की हैं। रामगढ़वा थाना क्षेत्र में ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सहयोग पोर्टल पर मिली शिकायत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

सील अस्पताल के संचालकों पर एफआईआर दर्ज

  • By Desk
  • November 6, 2026
  • 5 views
सील अस्पताल के संचालकों पर एफआईआर दर्ज

अवैध मेडिकल स्टोर पर छापेमारी, 43 प्रकार की दवाएं जब्त

  • By Desk
  • November 6, 2026
  • 4 views
अवैध मेडिकल स्टोर पर छापेमारी, 43 प्रकार की दवाएं जब्त

एफडीए ने 954 मिठाई दुकानों के लाइसेंस किए निलंबित

  • By Desk
  • November 6, 2026
  • 4 views
एफडीए ने 954 मिठाई दुकानों के लाइसेंस किए निलंबित

मेडिकल स्टोरों की दवाओं के सैंपल मिले फेल, कंपनी पर कार्रवाई

  • By Desk
  • November 6, 2026
  • 4 views
मेडिकल स्टोरों की दवाओं के सैंपल मिले फेल, कंपनी पर कार्रवाई

भारतीय दवा उद्योग की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

  • By Desk
  • November 6, 2026
  • 5 views
भारतीय दवा उद्योग की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और निजी अस्पताल बंद कराए

  • By Desk
  • November 5, 2026
  • 12 views
अवैध रूप से संचालित क्लीनिक और निजी अस्पताल बंद कराए