नई दिल्ली। नकली दवाओं पर नकेल के लिए केंद्र सरकार सख्त कानून ला रही है। दूषित कफ सीरफ पीने से कई बच्चों की मौत के बाद यह फैसला लिया गया। मापदंड और नियम-कायदों को ताख पर रख दवाइयां बनाई जा रही हैं। अब इस पर लगाम लगाने की तैयारी शुरू हो गई है।

यह है मामला

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कड़ा कानून बनाने की तैयारी में जुट गया है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में मसौदे पर चर्चा हुई। जल्द ही इस मसौदे को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के सामने भेजा जाएगा। आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा।

बैठक में सीडीएससीओ डीसीआई ने नए प्रस्तावित कानून का मसौदा पेश किया। नया कानून 1949 के औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम की जगह लेगा। इसमें दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सीडीएससीओ को अधिक शक्तियों का प्रविधान किया है।

सीडीएससीओ को अधिक अधिकार दिया जाएगा। अभी यह अधिकार राज्यों के खाद्य व औषधि विभाग के पास है। नया कानून अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य निर्माण से लेकर बाजार वितरण तक, हर स्तर पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

प्रस्तावित कानून की खास बातें

1. सीडीएससीओ को कम गुणवत्ता वाली दवाओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के लिए वैधानिक शक्तियां प्रदान होंगी।
2. घरेलू उपयोग और निर्यात दोनों के लिए गुणवत्ता जांच और निगरानी का अधिकार दिया जाएगा।
3. दवाओं, मेडिकल उपकरण या सौंदर्य प्रसाधन निर्माता इकाइयों को पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
4. लाइसेंसिंग प्रक्रिया को डिजिटल बनान और परीक्षण प्रयोगशालाओं को उन्नत करने के प्रविधान किए जाएंगे।