नई दिल्ली। नकली कैंसर रोधी दवा मामले के आरोपियों को जमानत दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने धन शोधन मामले में कई आरोपियों को जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मीडिया रिपोर्टिंग पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
यह है मामला
दिल्ली पुलिस ने नकली कैंसर दवाओं के निर्माण गिरोह की जांच की थी। मोती नगर में पुलिस ने कुछ लोगों को महंगी कैंसर रोधी दवाओं के लेबल वाली खाली शीशियों में दवा भरते हुए पकड़ा। इसके बाद मामला दर्ज किया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने नकली दवाओं की बिक्री से प्राप्त धन के आरोप में कार्यवाही शुरू की। जमानत आवेदनों का मूल्यांकन करते समय, न्यायालय ने रखी गई दो कठिन शर्तों की जांच की। इनके अनुसार यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आरोपी दोषी नहीं हैं।
जमानत पर रहते हुए अपराध करने की संभावना नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इन शर्तों का मूल्यांकन विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों को खारिज करना था। न्यायालय ने माना कि हिरासत के दौरान अभियुक्तों द्वारा दिए गए ऐसे बयान स्वैच्छिक नहीं माने जा सकते। न्यायालय ने पाया कि अस्पतालों से प्राप्त खाली शीशियों के स्रोत की कोई जांच नहीं की गई। न ही डॉक्टरों, फार्मासिस्टों या अंतिम उपयोगकर्ताओं से पूछताछ की गई। जांच से पता चला कि जब्त की गई शीशियों में असली दवाएं थीं। इससे अभियोजन पक्ष के दावों पर संदेह पैदा होता है।
यह भी पाया कि आरोपियों के वित्तीय लेन-देन अपेक्षाकृत मामूली थे। कुछ आरोपी पहले से ही मूल अपराध के लिए जमानत पर थे। अन्य के खिलाफ अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया था। न्यायालय ने आरोपियों के लंबे समय तक कारावास और मुकदमे में और देरी की संभावना पर भी ध्यान दिया।










