शिमला (हिमाचल प्रदेश)। फार्मा उद्योग के लिए सख्त हिदायत जारी की गई हैं। बाजार में उतरने वाली नई दवाओं की निगरानी अब और सख्त होगी। केंद्र सरकार ने दवाओं के दुष्प्रभाव को लेकर नई व्यवस्था लागू की है।

सीडीएससीओ के संयुक्त दवा नियंत्रक डॉ. आर चंद्रशेखर ने एडवाइजरी जारी की है। नई दवाओं की पीरियोडिक सेफ्टी अपडेट रिपोर्ट (पीएसयूआर) अब दवा की वास्तविक बिक्री शुरू होने की तिथि से मानी जाएगी। ऐसे में फार्मा कंपनियों को दवा बाजार में उतारने के बाद से सुरक्षा संबंधी जानकारियों की नियमित रिपोर्ट देनी होगी।

कंपनियों को दवा के अलग-अलग डोज, फॉर्मूलेशन आदि आंकड़े एक ही रिपोर्ट में बताने होंगे। इससे दवा की प्रभावशीलता और संभावित जोखिमों की समीक्षा संभव हो सकेगी। फार्मा उद्योगों के लिए यह नियम चुनौती के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा। हिमाचल देश का बड़ा फार्मा हब बन चुका है। यहां निर्मित दवाएं देश-विदेश तक पहुंचती हैं। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत होना जरूरी है। नई व्यवस्था लागू होने से बाजार में दवाओं की लगातार मॉनीटरिंग होगी। किसी भी दवा के दुष्प्रभाव सामने आने पर समय रहते कार्रवाई संभव हो पाएगी। इससे मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ फार्मा कंपनियों की जवाबदेही भी तय होगी।

कई बार हो चुके हैं दवाओं के सैंपल फेल

प्रदेश में जिला सोलन को फार्मा का हब माना जाता है। प्रदेश में करीब 600 फार्मा उद्योग प्रदेश स्थापित हैं। सीडीएससीओ समय-समय पर बाजार में मौजूद दवाइयों के सैंपल लेकर जांच करवाता है। ऐसे में प्रदेश में निर्मित कई दवाइयों के सैंपल सीडीएससीओ के तय मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं।