जयपुर। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जांच में फेल मिला है। इसके चलते बैच पर रोक लगा दी गई है। कोटा में प्रसूताओं की मौत के मामले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट में ये फेल बताए गए हैं। राजस्थान खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने यह जांच की। दवा में उसका मुख्य सक्रिय तत्व ही मौजूद नहीं था। इस खुलासे के बाद चिकित्सा विभाग और औषधि नियंत्रण तंत्र में हडक़ंप मच गया है। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का नमूना सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी, कोलकाता की जांच में फेल हो गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि दवा में ऑक्सीटोसिन कंटेंट अनुपस्थित मिला। इसकी सप्लाई कोटा के अस्पताल में लोकल खरीद के जरिए की गई थी। दवा का बैच नंबर 1049 बताया गया है। इसका निर्माण अमृतसर की जेक्सन लेबोरेटरीज ने किया था। रिपोर्ट के बाद संबंधित बैच की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी है। अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों से भी इस दवा को हटाने के निर्देश दिए हैं। कोटा मामले के बाद कुल 22 दवाओं के सैंपल की जांच की थी। इनमें से 21 दवाओं की रिपोर्ट सामान्य आई है।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का सैंपल अमानक पाया गया।ऑक्सीटोसिन प्रसव के दौरान उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण इमरजेंसी दवा है। इसका उपयोग गर्भाशय के संकुचन बढ़ाने और डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव रोकने के लिए किया जाता है। यदि दवा निष्प्रभावी हो तो प्रसूता में गंभीर ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। यह कई बार जानलेवा भी साबित होता है।










