नई दिल्ली। कैंसर बीमारी को तीन आम दवाएं न्यौता दे रही हैं। इनके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेताया है। एजेंसी ने तीन आम दवाओं को कैंसरकारी ग्रुप-1 श्रेणी में रखा है।
इन दवाओं के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज बंद नहीं करना चाहिए।
इन तीन दवाओं को बताया कैंसरकारी
1. हाइड्रोक्लोथियाजाइड
2. वोरिकोनाजोल
3. अटक्रोलिमस
WHO की स्टडी में इन दवाओं से खतरे की पहचान हुई है। पैनल में भारतीय वैज्ञानिक जीबी जेना भी शामिल थे। हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड से होठ का कैंसर हो सकता है। स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा त्वचा के कैंसर का दूसरा सबसे आम प्रकार है।
हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड से मरीजों में स्किन कैंसर की दर ज्यादा मिली। इसकी वजह फोटो-टॉक्सिसिटी है। यह अल्ट्रावायलेट रेडिएशन के प्रति त्वचा की सेंसिटिविटी बढ़ा देती है। इससे डीएनए को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ता है।
वोरिकोनाजोल
ट्रांसप्लांट के मरीजों में वोरिकोनाजोल का संबंध भी स्क्वैमस सेल स्किन से पाया। इसकी वजह भी फोटो टॉक्सिक तंत्र था। यह दवा विशेष प्रकार के त्वचा कैंसर को बढ़ावा देती है।
टैक्रोलिमस
टैक्रोलिमस का संबंध नॉन-हॉजकिन लिंफोमा से जोड़ा गया। ल्यूकेमिया और स्किन कार्सिनोमा के मामले में इसके सबूत सीमित थे। इसका खतरा इम्यून सिस्टम को दबाने से जुड़ा है। इससे शरीर की असामान्य सेल्स को खत्म करने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए पहली पसंद है। वोरिकोनाजोल का इस्तेमाल मरीजों में किया जाता है। ट्रैक्रोलिमस ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल में प्रमुख रूप से दी जाती है। इन चेतावनियों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। भारत में बिना सोचे-समझे दवा लिखना आम बात है। बिना डॉक्टर की पर्ची के दवा मिलना भी चुनौती है।










