मुंबई। पल्स फार्मा को विटामिन डी3 ओरल डिस्पर्शन के लिए मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी उसे ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से मिली है। कंपनी ने कहा कि इस मंजूरी से उन्नत नैनो फार्मास्युटिकल अनुसंधान एक विनियमित, रोगी-उपलब्ध उत्पाद में बदल जाएगा।
एमडी केवी रामबाबू ने कहा कि इस तरह की मंजूरी शायद दुनिया में पहली बार मिली है। इससे अपने उत्पाद पड़ोसी देशों में ले जाने का रास्ता खुलेगा। साथ ही अत्यधिक विनियमित बाजारों में नियामक मंजूरी प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि कंपनी 2010 से नैनो फार्मास्युटिकल ड्रग डिलीवरी के क्षेत्र में है। नैनो तकनीक का उपयोग करके दवा की कार्यक्षमता, जैव उपलब्धता को बेहतर बनाती है। इसने दवाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए कई मालिकाना प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं।
कंपनी के पास भारत, अमेरिका, रूस, मैक्सिको और ऑस्ट्रेलिया में पांच पेटेंट हैं। उसकी एक्वियोल तकनीक के लिए यूरोपीय संघ का एक पेटेंट मंजूरी के अंतिम चरण में है। इसने 7 प्रमुख देशों में 4 अन्य मालिकाना प्लेटफार्मों के लिए पेटेंट दाखिल किए हैं। 3 और के लिए पेटेंट दाखिल करने पर काम कर रहा है।










